ओस्लो में प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय राजनयिक और नॉर्वेजियन पत्रकार के बीच तीखी बहस, MEA ने लोकतंत्र पर रखा भारत का पक्ष

नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के वरिष्ठ अधिकारी और एक नॉर्वेजियन पत्रकार के बीच प्रेस फ्रीडम, अल्पसंख्यक अधिकारों और मानवाधिकारों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। इस दौरान माहौल उस समय और तनावपूर्ण हो गया जब पत्रकार ने बार-बार सवाल पूछते हुए भारतीय प्रतिनिधियों को चुनौती दी।
मीडिया इंटरैक्शन के दौरान MEA (West) सचिव सिबी जॉर्ज ने भारत के लोकतांत्रिक ढांचे का बचाव करते हुए कहा कि देश के बारे में अक्सर बाहरी पर्यवेक्षक सीमित और चयनित रिपोर्टों के आधार पर राय बना लेते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता और पैमाना समझे बिना आलोचना करना सही नहीं है।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब पत्रकार हैले लिंग ने सवाल किया कि भारत को लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और अधिकारों के मामले में क्यों “विश्वसनीय” माना जाए। जवाब में जॉर्ज ने भारत के संविधान, मौलिक अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं का उल्लेख करते हुए देश की व्यवस्था का बचाव किया। उन्होंने कहा कि भारत में नागरिकों को संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं और उल्लंघन की स्थिति में कानूनी उपाय मौजूद हैं।
जॉर्ज ने आगे भारत में महिलाओं के मतदान अधिकारों का भी जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के तुरंत बाद ही भारत ने महिलाओं को वोटिंग का अधिकार दिया, जो कई देशों में बाद में लागू हुआ। उन्होंने भारत के चुनावी लोकतंत्र को मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उदाहरण बताया।
वहीं दूसरी ओर, पत्रकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पहले आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके सवालों का जवाब नहीं दिया। इस पोस्ट के बाद भारतीय दूतावास ने उन्हें प्रेस वार्ता में शामिल होने और सवाल पूछने के लिए आमंत्रित किया था।
इस पूरे मामले को लेकर भारत में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली, जहां विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पत्रकार की पोस्ट साझा करते हुए सरकार पर सवाल उठाए। यह घटना अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि और प्रेस फ्रीडम को लेकर एक नई बहस का विषय बन गई है।






