दुर्लभ मृदा चुंबक निर्माण के लिए भारत ने मांगी वैश्विक बोलियां, 7280 करोड़ की योजना को रफ्तार

भारत सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए दुर्लभ मृदा चुंबक (Rare Earth Magnet) निर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए वैश्विक स्तर पर बोलियां आमंत्रित की हैं। भारी उद्योग मंत्रालय ने इस दिशा में ‘प्रस्ताव के लिए अनुरोध’ (RFP) जारी किया है।

6000 MTPA क्षमता वाले प्लांट होंगे स्थापित

इस योजना के तहत देश में कुल 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) क्षमता वाली सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) इकाइयों की स्थापना की जाएगी। ये इकाइयां विशेष रूप से NdFeB (नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन) आधारित मैग्नेट का उत्पादन करेंगी, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र में अहम भूमिका निभाते हैं।

पारदर्शी ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया

निविदा प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और इसे केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल के माध्यम से संचालित किया जाएगा।

  • प्रक्रिया: दो चरण (तकनीकी + वित्तीय बोली)

  • प्रणाली: न्यूनतम लागत प्रणाली (LCS)

  • अंतिम तिथि: 28 मई

  • तकनीकी बोलियां खुलेंगी: 29 मई

7280 करोड़ की योजना को मिला था कैबिनेट मंजूरी

इस महत्वाकांक्षी योजना को नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 26 नवंबर 2025 को मंजूरी दी थी।

  • कुल बजट: ₹7,280 करोड़

  • उद्देश्य: घरेलू उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना

क्यों अहम है यह कदम?

रेयर अर्थ मैग्नेट आधुनिक तकनीक का आधार हैं:

  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV)

  • पवन ऊर्जा (Wind Energy)

  • मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स

  • रक्षा उपकरण

👉 इस पहल से भारत वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत भूमिका निभा सकेगा और ‘मेक इन इंडिया’ को नई गति मिलेगी।

उद्योग के लिए बड़ा अवसर

इस टेंडर के जरिए देश और विदेश की कंपनियों को भारत में निवेश और उत्पादन का मौका मिलेगा, जिससे रोजगार सृजन और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

👉 कुल मिलाकर, यह पहल भारत को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम मानी जा रही है।

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