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जैव विविधता संरक्षण को पंचायतों से जोड़ने के लिए केंद्र की 5 वर्षीय परियोजना शुरू

नई दिल्ली। देश में जैव विविधता संरक्षण को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने पांच वर्षीय महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं में जैव विविधता संरक्षण को शामिल करना और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़ना है।

यह परियोजना Ministry of Environment Forest and Climate Change और National Biodiversity Authority द्वारा वर्ष 2025 से 2030 तक संचालित की जाएगी। इसे Global Environment Facility और United Nations Development Programme के सहयोग से 4.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता प्राप्त होगी।

परियोजना को दो प्रमुख पारिस्थितिक क्षेत्रों में लागू किया जाएगा। तमिलनाडु के सत्यमंगलम परिदृश्य में Mudumalai Tiger Reserve और Sathyamangalam Tiger Reserve शामिल हैं, जहां स्थानीय समुदायों की भागीदारी से संरक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं मेघालय के गारो हिल्स क्षेत्र में Nokrek Biosphere Reserve, Balpakram National Park और Siju Wildlife Sanctuary के माध्यम से सामुदायिक संरक्षण को मजबूत किया जाएगा।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं और जैव विविधता प्रबंधन समितियों को सशक्त बनाना है, ताकि स्थानीय स्तर पर प्रभावी संरक्षण योजनाएं लागू की जा सकें। इसके तहत विभिन्न विभागों, जनप्रतिनिधियों और नागरिक समाज के सहयोग से सामुदायिक भागीदारी आधारित मॉडल तैयार किए जाएंगे।

परियोजना में हरित सूक्ष्म उद्यम, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और लाभ-साझेदारी जैसे नवाचारी वित्तीय तंत्र विकसित किए जाएंगे, जिससे संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर भी सृजित होंगे।

इसके अलावा, ज्ञान प्रबंधन और क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि इन क्षेत्रों में विकसित मॉडलों को देशभर में लागू किया जा सके। महिलाओं, अनुसूचित जातियों और जनजातीय समुदायों की भागीदारी को भी प्राथमिकता दी गई है।

मंत्रालय के अनुसार यह पहल भारत की राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति (2024-2030) और Paris Agreement के तहत निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में सहायक होगी, साथ ही वैश्विक जैव विविधता संरक्षण प्रयासों को भी मजबूती देगी।

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