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इजराइल का हिजबुल्लाह पर बड़ा हमला: 2 KM लंबी सुरंग उड़ाई; नेतन्याहू बोले- मिशन पूरा

बेरूत। इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की एक बड़ी सुरंग को विस्फोट कर नष्ट कर दिया है। यह सुरंग 2 किलोमीटर से ज्यादा लंबी थी। धमाका इतना तेज था कि आसपास के इलाके में भूकंप जैसे झटके महसूस किए गए। झटकों की तीव्रता 4.1 बताई गई। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने पोस्ट में कहा कि मिशन पूरा हो गया है।

सुरंग के अंदर बड़ी मात्रा में हथियार रखे गए थे। इनमें रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन शामिल थे। यहां मशीनगन, एंटी-टैंक हथियार और कई विस्फोटक भी मिले। इजराइल का दावा है कि इसी परिसर में हिजबुल्लाह की ‘बद्र यूनिट’ का कमांड सेंटर भी मौजूद था।

20 साल में तैयार किया गया था नेटवर्क
इस भूमिगत नेटवर्क को तैयार करने में करीब 20 साल लगे। इजराइल का आरोप है कि इसके लिए ईरान से आर्थिक मदद मिली थी। यह सुरंग दक्षिणी लेबनान की अली अल-ताहेर पहाड़ी के आसपास बनी थी। इजराइल का कहना है कि अब उसके सैनिक इस इलाके में जमीन के ऊपर और नीचे दोनों हिस्सों पर नियंत्रण कर चुके हैं।

हिजबुल्लाह की बद्र यूनिट क्या है?
‘बद्र यूनिट’ हिजबुल्लाह की दक्षिणी लेबनान में सक्रिय प्रमुख सैन्य इकाइयों में से एक बताई जाती है। इसका क्षेत्र लिटानी नदी के उत्तर में बताया जाता है। इस यूनिट का नाम इस्लामिक इतिहास की बद्र की लड़ाई से जुड़ा है।

दक्षिणी लेबनान में फिर बढ़े हमले
पिछले कुछ दिनों में दक्षिणी लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई तेज हुई है। दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के लिए पहले बातचीत और समझौते की कोशिशें भी हुई थीं, लेकिन इलाके में फिर से हमले शुरू हो गए।

इजराइली सेना का कहना है कि दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया है। दूसरी ओर, लेबनान में इन हमलों को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है।

2006 के युद्ध के बाद क्यों बढ़ा सुरंगों का इस्तेमाल?
2006 में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच हुए युद्ध के दौरान इजराइली हवाई हमलों में हिजबुल्लाह के कई खुले ठिकाने निशाने पर आए थे। इसके बाद संगठन ने अपने सैन्य ढांचे को जमीन के नीचे ले जाने पर ज्यादा जोर दिया।

सुरंगों और बंकरों की मदद से हथियार, लड़ाके और कमांड सेंटर हवाई निगरानी से छिपाए जा सकते हैं। इससे हमलों के बाद भी सैन्य गतिविधियां जारी रखना आसान होता है।

सुरंगों को ढूंढना क्यों मुश्किल?
जमीन के ऊपर मौजूद ठिकानों की पहचान ड्रोन और निगरानी से अपेक्षाकृत आसान होती है। लेकिन भूमिगत सुरंगों का पूरा नेटवर्क बाहर से दिखाई नहीं देता। एक सुरंग के अंदर कई रास्ते, कमरे और दूसरे हिस्से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए उनका पता लगाना और पूरे नेटवर्क को नष्ट करना चुनौतीपूर्ण होता है।

इजराइल ऐसी जगहों की पहचान के लिए खुफिया जानकारी, ड्रोन और दूसरी निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल करता है। संभावित स्थान मिलने के बाद वहां मौजूद सुरागों के आधार पर सुरंग के प्रवेश और नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जाती है।

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