बेटी की आत्मा बोलेगी- पापा न्याय क्यों नहीं दिलाया: इसलिए आखिरी सांस यहीं लूंगा; 30 हजार के लिए किया मेरे जिगर के टुकड़े का कत्ल,हालत गंभीर

रीवा। वह बचपन में मेरे साथ खेलती थी। मेरी थाली में खाती थी। मेरे बिना एक पल नहीं रहती थी। कहती थी पापा आप मेरे हीरो हो। मेरी इकलौती बेटी मेरे जिगर का टुकड़ा थी।
अब यह यादें अतीत बन गई क्योंकि उसकी आखिरी चीख कानों में गूंज रही है। 10 दिन उपवास के बाद मुझे सब धुंधला दिखाई देता है। लेकिन उस धुंधलेपन में ऐसा लगता है कि कहीं मेरी बेटी मेरी आंखों के सामने आकर खड़ी हो गई है।
‘पापा तुमने मुझे क्यों नहीं बचाया’
वह मुझसे कहती है कि पापा तुमने मुझे क्यों नहीं बचाया। उन कातिल डॉक्टर के हाथों मुझे सौंप दिया। यह दर्द मुझे पल-पल खाये जा रहा है कि जिन हाथों से उसे पाल पोस कर बड़ा किया, उंगली पड़कर चलना सिखाया, उन्हें हाथों से मैं भला अपनी बेटी को उन कातिलों के हाथों में कैसे सौंप दिया।
वह कह रही थी कि मुझे मार देंगे। मैंने सोचा अभी भी बच्ची है। 22 साल की है तो क्या हुआ। शायद डॉक्टर से डर रही है, लेकिन वह सच बोल रही थी।
वह आईसीयू से बाहर भाग कर आई तो अपने पैरों में थी, लेकिन लौटी स्ट्रेचर पर। वह चीख उसकी आखिरी चीख बन गई। कातिलों ने उसे मार डाला। हम केवल तमाशा देखते रह गए।

‘वह मेरी इकलौती बेटी थी’
वह मेरी इकलौती बेटी थी। मैं गरीब था फिर भी 15 लाख में खेत बेचकर उसकी शादी धूमधाम से की। मैं सोचा भीख मांग कर भी खा लूंगा लेकिन मेरी बिटिया की नाक नहीं कटनी चाहिए। उसकी शादी में कोई कमी ना रह जाए। मेरी वजह से उसे कोई ताना ना मारे।
केवल 9 महीने हुए थे मैंने अपनी आंखों में नाना बनने का सपना सजाया था। लेकिन जैसे ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था।
’30 हजार दे देने चाहिए थे’
दो बेटों के बाद जब बिटिया हुई तो गांव के लोगों ने कहा- इस बार बेटा नहीं हुआ एक बिटिया हो गई। मैंने कहा- बिटिया नहीं मेरी तकदीर आई है। उसके कारण घर का आंगन गुलजार हो गया।
वह पापा पापा कह के दौड़ती तो ऐसा लगता जैसे कानों में कोई मीठी लोरी सुना रहा है। दिन भर की थकान और समस्याओं के बाद भी जब बिटिया यह पूछती थी कि पापा खाना खा लो तो मानो ऐसा लगता था की सारी थकान दूर हो गई।

‘धरना क्या समाप्त कर दूं’
फिर भी लोग कहते हैं कि धरना समाप्त कर दो। धरना क्या समाप्त कर दूं और खाना क्या खा लूं, जब मेरे अंदर जीने की इच्छा ही नहीं रह गई।
मैं वह मजबूर बाप हूं, जो अपनी बेटी के लिए लड़ रहा हूं, उसे बचा तो पाया नहीं, उल्टा कुछ लोग लांछन भी लगते हैं कि मैं भी किसी राजनीति से प्रेरित हूं।
अरे जिसके जिगर का टुकड़ा चला जाएगा तो वह राजनीति नहीं बल्कि ढंग से खा पी भी नहीं पाएगा।
‘जब तक शरीर में आखिरी सांस है, तब तक यहां पर डटा रहूंगा’
बेटी के लिए लड़ते हुए मारूंगा तो मुझे मोक्ष मिल जाएगा। वैसे भी एक दिन मर ही जाना है, नहीं तो मेरी बेटी कहेगी कि पापा आप कितने स्वार्थी थे, मेरे हत्यारों को सजा तक नहीं दिलवा पाए।

अब विस्तार से जान लीजिए पूरा मामला
यह दर्द मृतक कल्पना मिश्रा के पिता राम शिरोमणि मिश्रा है। जो रीवा के संजय गांधी अस्पताल में जच्चा और बच्चा डॉक्टर की लापरवही से खत्म हो गए। मजबूर पिता 10 दिन से भूख हड़ताल पर रीवा के सिरमौर चौराहे में बैठा हुआ है। अन्न का एक दाना नहीं ले रहे हैं।
विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े गांधी स्मारक एवं संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में घटित इस हृदयविदारक घटना ने पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 22 वर्षीय प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की उपचार के दौरान हुई दर्दनाक मौत के बाद से ही शहर में जनाक्रोश का माहौल व्याप्त है।
घटना की टाइमलाइन
- 26 अगस्त 2026 की रात
प्रसव हेतु भर्ती कराई गई कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर उचित इलाज न देने तथा कथित तौर पर ₹30,000 की रिश्वत मांग पूरी न होने के कारण यह अनहोनी हुई। - मौत से ठीक पहले का वीडियो वायरल
घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया जिसमें पीड़िता कल्पना मिश्रा अस्पताल के वार्ड से बाहर भागकर परिजनों से खुद को बचाने और डॉक्टरों से डर लगने की गुहार लगाती दिख रही थी। - पिता का आमरण अनशन
बेटी और नाती को खोने के बाद पिता राम शिरोमणि मिश्रा रीवा के सिरमौर चौराहे पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। 10 दिनों से अन्न-जल का त्याग करने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति अत्यधिक नाजुक हो चुकी है।
प्रशासनिक हलचल और राजनीतिक प्रभाव
- कलेक्टर व पुलिस प्रशासन की पहल
रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने धरना स्थल पहुंचकर राम शिरोमणि मिश्रा से मुलाकात की तथा स्वास्थ्य परीक्षण कराने व अनशन समाप्त करने की अपील की, लेकिन पीड़ित पिता दोषियों पर नामजद एफआईआर दर्ज होने की मांग पर अड़े हुए हैं। - प्रशासनिक कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए रीवा मेडिकल कॉलेज के डीन पर गाज गिरी और उन्हें पद से हटाया गया। - विपक्ष का प्रदर्शन व घेराव
मामले ने तूल पकड़ते ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और स्थानीय विधायकों सहित विपक्षी नेताओं ने अस्पताल प्रबंधन व सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। - पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प
यूथ कांग्रेस द्वारा स्वास्थ्य मंत्री के आवास के घेराव के प्रयास के दौरान पुलिस को आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन का प्रयोग करना पड़ा।
पीड़ित परिवार अब भी निष्पक्ष जांच, दोषी डॉक्टरों पर आपराधिक मामला दर्ज करने और मामले की उच्चस्तरीय अथवा स्वतंत्र एजेंसी (सीबीआई) से जांच की मांग पर कायम है।