पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी को नई उड़ान देगा गुवाहाटी रिंग रोड प्रोजेक्ट, 5700 करोड़ से बदलेगी तस्वीर

पूर्वोत्तर भारत की सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में गुवाहाटी रिंग रोड प्रोजेक्ट (Guwahati Ring Road Project) एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। करीब 5,700 करोड़ रुपये की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना न सिर्फ गुवाहाटी शहर में ट्रैफिक दबाव कम करेगी, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था को नई गति देने का काम करेगी।
केंद्र सरकार की एक्ट ईस्ट-एक्ट फर्स्ट पॉलिसी के तहत विकसित की जा रही इस परियोजना का उद्देश्य गुवाहाटी को पूर्वोत्तर भारत के साथ-साथ आसियान देशों के व्यापारिक प्रवेश द्वार के रूप में मजबूत बनाना है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह परियोजना पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी (Northeast Connectivity) को नई दिशा देगी।
121 किलोमीटर लंबा होगा नेटवर्क
यह प्रोजेक्ट बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) टोल मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है और इसकी कुल लंबाई लगभग 121 किलोमीटर होगी। परियोजना के तहत बाइहाटा चारियाली से सोनापुर तक 55.54 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड नॉर्दर्न बाइपास बनाया जाएगा, जिससे गुवाहाटी शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होगा।
ब्रह्मपुत्र पर बनेगा 6 लेन का विशाल पुल
इस परियोजना की सबसे अहम विशेषताओं में ब्रह्मपुत्र नदी पर कुरुआ से नारेंगी के बीच प्रस्तावित 6 लेन पुल (Brahmaputra Bridge) शामिल है। करीब 3 किलोमीटर लंबे इस पुल से मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही तेज होगी और शहर के मौजूदा मार्गों पर ट्रैफिक का बोझ घटेगा।
NH-27 कॉरिडोर को मिलेगा फायदा
परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (NH27 Project) के कुछ हिस्सों का चौड़ीकरण भी किया जाएगा। इससे सिलचर, शिलांग और अपर असम जैसे प्रमुख क्षेत्रों तक संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे व्यापार, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी।
पर्यावरण और वन्यजीवों का भी रखा जाएगा ध्यान
परियोजना के लिए वन भूमि हस्तांतरण की पर्यावरणीय मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन हाथी गलियारों (Elephant Corridor) की सुरक्षा को लेकर विशेष शर्तें लगाई गई हैं। वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए बशिष्ठ और जोराबाट के बीच एलिवेटेड रोड सेक्शन बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
2027 से 2030 के बीच पूरा होगा प्रोजेक्ट
जानकारी के मुताबिक, 2025 के मानसून के बाद निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से 2027 से 2030 के बीच पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 30 वर्ष की कंसेशन अवधि वाले इस मॉडल में शुरुआती चार साल निर्माण कार्य के लिए निर्धारित किए गए हैं।
गुवाहाटी रिंग रोड प्रोजेक्ट को पूर्वोत्तर भारत के बुनियादी ढांचे में एक बड़ा निवेश माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय विकास और आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार बन सकता है।





