ईरान पर हमले में इस्तेमाल हुआ एलन मस्क का AI! ट्रंप सरकार ने कोर्ट में किया बड़ा खुलासा

ईरान पर हमले के लिए अमेरिका ने इस्तेमाल किया एलन मस्क का AI टूल- ट्रंप सरकार ने खुद कबूला

दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल ग्रोक का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों (Use of AI in War) में किया गया था। यह बात खुद अमेरिकी सरकार ने एक कानूनी दस्तावेज में बताई है। 15 जून को दाखिल इस दस्तावेज के जरिए एलन मस्क की कंपनी xAI के विशाल डेटा सेंटर में इस्तेमाल हो रहे गैस टर्बाइनों का बचाव किया गया है। इन टर्बाइनों को लेकर पर्यावरण से जुड़ा एक मुकदमा चल रहा है और ऐसे में एलन मस्क का बचाव करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप की सरकार सामने आई है। एलन मस्क के AI टूल की जरूरत साबित करने के लिए सबूत के तौर पर ट्रंप सरकार ने बताया कि इसकी मदद से ईरान पर हमला किया गया।

ट्रंप सरकार ने क्या बताया है?

इस दस्तावाज में अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि xAI के खिलाफ यह पूरा केस अमेरिका की राष्ट्रीय, आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है। इस केस के जरिए उस बिजली आपूर्ति को बंद कराने की कोशिश की जा रही है जो AI से जुड़े इनोवेशन को शक्ति देती है और जो अमेरिका के सैन्य अभियानों का सपोर्ट करती है।

अपने तर्क को और मजबूती देने के लिए सरकारी वकीलों ने कैमरन स्टेनली की गवाही पेश की, जो पेंटागन के AI प्रमुख हैं। उन्होंने शपथ लेकर कहा कि ग्रोक AI का इस्तेमाल पहले से ही प्रोजेक्ट मेवन में किया जा रहा है। बता दें कि प्रोजेक्ट मेवन अमेरिकी सेना का AI से लैस टारगेट चुनने वाला कार्यक्रम है। शुरुआत में यह एंथ्रोपिक कंपनी के क्लॉड मॉडल पर आधारित था।

कैमरन स्टेनली के बयान के अनुसार, प्रोजेक्ट मेवन की मेवन स्मार्ट सिस्टम्स तकनीक ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान अमेरिकी सेना को सिर्फ 96 घंटों में 2,000 अलग-अलग टारगेट पर 2,000 से ज्यादा हथियार दागने में मदद की। स्टेनली ने एलन मस्क की तकनीक की तारीफ की और कहा कि “ग्रोक गव मॉडल” की वजह से सैन्य अभियानों की क्षमता और गति बहुत तेज हो गई है।

एलन मस्क के खिलाफ केस किसने किया है?

अमेरिका के अश्वेत लोगों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक नागरिक अधिकार संगठन NAACP ने x AI पर मुकदमा किया है। इस संगठन का आरोप है कि xAI बिना अनुमति लिए दर्जनों गैस टर्बाइन चला रहा है, जो क्लीन एयर नाम के कानून का उल्लंघन है। इस अधिकार समूह का कहना है कि ये टर्बाइन उन इलाकों को प्रदूषित कर रहे हैं जहां अधिकतर अश्वेत लोग रहते हैं।

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