धार भोजशाला में मुसलमानों ने पढ़ी जुम्मे की नमाज: हिंदुओं ने हनुमान चालीसा; SP-कलेक्टर मौके पर, पुलिस अलर्ट

धार। भोजशाला आज फिर हाई अलर्ट पर है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सर्वे क्रमांक 612 पर नमाज अदा की व्यवस्था प्रशासन द्वारा की गई।
हिंदू समाज ने भोजशाला में महाआरती और हनुमान चालीसा का आह्वान किया है। सुरक्षा को लेकर चाक चौबंद व्यवस्था की गई हैं, कलेक्टर एसपी मौके पर मौजूद हैं।
पूरी स्थिति पर धार कलेक्टर राजीव रंजना मीना, एसपी सचिन शर्मा और प्रशासनिक अमला लगातार नजर बनाए हुए था। 1000 से अधिक पुलिस बल भी तैनात किया गया।
सर्वे नंबर 612 पर पढ़ी नमाज
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के तहत भोजशाला परिसर के पास सर्वे नंबर 612 पर मुस्लिम समाज द्वारा 1 से 3 बजे तक नमाज पढ़ी। भोजशाला में हिंदू समाज द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए एसपी और कलेक्टर खुद मौके पर मौजूद हैं।
दरगाह पर जाने के लिए अलग मार्ग की व्यवस्था
प्रशासन ने नमाज के बाद मुस्लिम समाज के लोगों के लिए कमाल मौला दरगाह पर जाने हेतु एक पृथक मार्ग की विशेष व्यवस्था की थी। इस सुव्यवस्थित और पृथक आवाजाही व्यवस्था के कारण भोजशाला परिसर में हिंदू धर्मावलंबियों का भी बिना किसी बाधा और विघ्न के आना-जाना निरंतर जारी रहा। प्रशासन की सूझबूझ और सतर्कता के चलते दोनों समाजों के धार्मिक आयोजन पूरी तरह से शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुए, जिससे शहर में राहत और सौहार्द का वातावरण बना रहा।
शहर में पूरी तरह से शांति
एस.पी विजय डावर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए नमाज़ अदा की गई। पूरे शहर में सुरक्षा के सभी इंतजाम है। सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। शहर में पूरी तरह से शांति है।
यह है विवाद?
धार की भोजशाला को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। हिंदू पक्ष भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष यहां नमाज पढ़ने का दावा करता है। इसी विवाद को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को भोजशाला के पास शुक्रवार की नमाज के लिए अलग स्थान उपलब्ध कराने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को खसरा नंबर 596 की ‘दरगाह भूमि’ नमाज के लिए दी थी। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि नमाज स्थल तक आने-जाने का रास्ता हिंदू श्रद्धालुओं के रास्ते से अलग रखा जाए जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े। कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से किसी दूसरे स्थान पर सहमत होते हैं तो उसका विकल्प खुला रहेगा।