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सीडीएस अनिल चौहान का बड़ा बयान, बदलते युद्ध स्वरूप के अनुसार सेना को ढालना जरूरी

Anil Chauhan ने बदलते वैश्विक परिदृश्य और युद्ध के नए स्वरूप के अनुरूप सशस्त्र बलों को ढालने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक और तकनीकी आयामों से भी प्रभावित हो रहा है।

बदलता युद्ध और नई रणनीति

सीडीएस ने नौसेना कमांडरों को संबोधित करते हुए कहा कि तेजी से बदलते युद्ध स्वरूप को देखते हुए नई रणनीतियां और योजनाएं तैयार करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने ‘नैरेटिव वॉरफेयर’ का जिक्र करते हुए कहा कि आज युद्ध केवल जमीन पर नहीं, बल्कि जानकारी और धारणा के स्तर पर भी लड़ा जा रहा है

नौसेना की भूमिका अहम

इस दौरान Dinesh K Tripathi ने भी सेना को “भविष्य के लिए तैयार” बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि:

  • उभरती तकनीकों को अपनाना जरूरी है
  • युद्ध की तैयारी पर लगातार ध्यान देना होगा
  • तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है

हिंद महासागर में बढ़ती जिम्मेदारी

नौसेना प्रमुख ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना को बहुपक्षीय और द्विपक्षीय सहयोग के जरिए मजबूत बनाना होगा।

ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री हित

सीडीएस चौहान ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में नौसेना की त्वरित तैनाती की सराहना की।
उन्होंने बताया कि फारस की खाड़ी से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा में भारतीय नौसेना ने अहम भूमिका निभाई है।

क्षमता निर्माण और स्वदेशीकरण पर फोकस

सम्मेलन में जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें शामिल हैं:

  • संयुक्तता (Jointness)
  • क्षमता विकास
  • उन्नत तकनीक का उपयोग
  • प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
  • राहत एवं बचाव कार्य
  • स्वदेशीकरण (Indigenisation)

‘फ्यूचर रेडी’ फोर्स की दिशा में कदम

नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय नौसेना “लड़ाई के लिए तैयार, भरोसेमंद, एकजुट और भविष्य के लिए तैयार” बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है।

बदलते वैश्विक हालात और तकनीकी चुनौतियों के बीच यह स्पष्ट है कि भारत अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने और हर मोर्चे पर मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

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