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बलोचिस्तान में 12 मजदूरों की सामूहिक हत्या का आरोप, कोस्ट गार्ड के खिलाफ भड़का गुस्सा

बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के अपीलीय विभाग ने 1971 के युद्ध अपराध मामले में जमात-ए-इस्लामी नेता एटीएम अजहरुल इस्लाम की मौत की सजा बरकरार रखने वाले अपने पुराने फैसले पर अफसोस जताया है। अदालत ने हाल ही में जारी फैसले के विस्तृत टेक्स्ट में स्वीकार किया कि पहले के निर्णय में सबूतों और मामले के व्यापक संदर्भ का निष्पक्ष मूल्यांकन नहीं हो सका था

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश सैयद रेफात अहमद की अगुवाई वाली सात सदस्यीय पीठ ने 74 पन्नों के फैसले में कहा कि अदालत अपने पूर्व के निर्णय पर “पूर्ण न्यायिक जिम्मेदारी” के साथ यह मानती है कि मामले में सबूतों की कमियों और व्यापक परिस्थितियों पर पर्याप्त निष्पक्ष विचार नहीं किया गया

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “इतने गंभीर आपराधिक मामलों में अपेक्षित निष्पक्षता और गहन जांच के उच्च मानकों को पहले के फैसले में पूरा नहीं किया गया”। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को रद्द करते हुए एटीएम अजहरुल इस्लाम को सभी आरोपों से बरी कर दिया और जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने वर्ष 2014 में एटीएम अजहरुल इस्लाम को 1971 के युद्ध के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। हालांकि 27 मई 2025 को अपीलीय विभाग ने अपने पूर्व निर्णय को पलट दिया

अजहरुल इस्लाम के वकील मोहम्मद शिशिर मनीर के अनुसार, उनके मुवक्किल 8 अगस्त 2012 से जेल में बंद थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें 28 मई 2025 को रिहा कर दिया गया

वर्तमान में एटीएम अजहरुल इस्लाम बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नायब-ए-अमीर हैं और हालिया राष्ट्रीय चुनाव में रंगपुर-2 सीट से सांसद चुने गए हैं

उल्लेखनीय है कि 1971 के युद्ध अपराध मामलों में मतिउर रहमान निजामी, अब्दुल कादर मुल्ला, मोहम्मद कमरुज्जमान, अली अहसान मोहम्मद मुजाहिद, मीर कासिम अली और बीएनपी नेता सलाहुद्दीन कादर चौधरी समेत कई नेताओं को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बाद फांसी दी जा चुकी है

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