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बांग्लादेश: डक्सू नेता का वीडियो वायरल, नाबालिगों को दी उठक-बैठक की सजा

बांग्लादेश की राजधानी में स्थित ढाका यूनिवर्सिटी से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें डक्सू (Dhaka University Central Students’ Union) के कार्यकारी सदस्य सरबा मित्रा चकमा नाबालिग लड़कों को सरेआम सजा देते दिखाई दे रहे हैं। इस घटना ने परिसर में बढ़ती ‘विजिलेंटे’ संस्कृति और मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया गया कि यह वीडियो 06 जनवरी शाम 4:44 बजे यूनिवर्सिटी के सेंट्रल खेल मैदान में रिकॉर्ड किया गया। क्लिप में सरबा मित्रा चकमा बच्चों को कान पकड़कर बार-बार उठक-बैठक करने का आदेश देते नजर आते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस तरह की सजा बांग्लादेशी कानून के तहत प्रतिबंधित मानी जाती है।

🔹 छड़ी लेकर सजा देते दिखे नेता

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वायरल वीडियो में चकमा के हाथ में छड़ी भी दिखाई दे रही है। बाद में इसी घटना के दो और वीडियो सामने आए, जिनमें अलग-अलग बच्चों के समूहों को इसी तरह सजा दी जा रही थी। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भारी नाराजगी देखने को मिली। लोगों ने उन पर अधिकारों का दुरुपयोग, बच्चों का अपमान और कानून अपने हाथ में लेने के आरोप लगाए।

🔹 फेसबुक पोस्ट में इस्तीफे का दावा

लगातार बढ़ती आलोचना के बीच सरबा मित्रा चकमा ने सोमवार को फेसबुक पोस्ट के जरिए इस्तीफे की घोषणा की और पछतावा जताते हुए कहा कि उन्होंने यह कदम “परिसर की सुरक्षा” के लिए उठाया था। हालांकि डक्सू अधिकारियों और यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई औपचारिक इस्तीफा प्राप्त नहीं हुआ है।

🔹 पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप

रिपोर्टों के अनुसार, सरबा मित्रा पर पिछले महीनों में कई बार मारपीट, धमकाने और ‘नैतिक पुलिसिंग’ जैसे आरोप लग चुके हैं। छात्रों के मुताबिक, सड़क विक्रेताओं, बाहरी आगंतुकों और संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ अभियानों के दौरान उन्होंने कथित तौर पर बल प्रयोग किया। एक मामले में बस ड्राइवर और हेल्पर से मारपीट तथा दूसरे मामले में एक बाइकर की बाइक क्षतिग्रस्त करने के आरोप भी सामने आए हैं।

🔹 प्रशासन ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

ढाका यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर सैफुद्दीन अहमद ने कहा कि वायरल वीडियो में दिखी गतिविधियां “पूरी तरह से उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर” थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी डक्सू सदस्य को सजा देने का अधिकार नहीं है। वाइस चांसलर की मंजूरी से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और इस्तीफा देने से जांच प्रक्रिया नहीं रुकेगी।

डक्सू के उपाध्यक्ष अबू शादिक कायमे ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया, जबकि महासचिव एसएम फरहाद ने कहा कि लिखित आवेदन के बिना किसी इस्तीफे पर विचार नहीं किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला छात्र राजनीति, कैंपस अनुशासन और मानवाधिकारों के संतुलन पर गंभीर बहस को जन्म दे सकता है।

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