बड़वानी का दो शिवलिंग वाला सिद्धनाथ मंदिर: स्वयंभू और दिव्य होने की मान्यता; राजाओं के समय से जल रही अखंड ज्योति

बड़वानी। रानीपुरा के सिद्धनाथ महादेव मंदिर में दो शिवलिंग स्थापित है। यह सबसे पुराना और प्रमुख आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहां स्थापित दो दिव्य शिवलिंगों में एक स्वयंभू है। दूसरा शिवलिंग उड़कर यहाँ आया है। इन्हें हरि और हर का प्रतीक मानते है। इन शिवलिंगों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
राजाओं के समय से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
पुजारी पंडित शैलेन्द्र तिवारी ने बताया कि उनके पिता भी वर्षों से यहां पूजा करते है। मंदिर का इतिहास बड़वानी रियासत के राजा रणजीत सिंह के समय से है। उस समय मंदिर राजपरिवार के संरक्षण में था। आज भी उसी परंपरा का पालन किया जाता है।

एक स्वयंभू, दूसरा उड़कर आया शिवलिंग
पंडित तिवारी के अनुसार मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित दो शिवलिंग हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इनमें से एक शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था, जबकि दूसरा शिवलिंग उड़कर यहां आया था। संतों और विद्वानों ने उसकी दिव्यता को पहचानकर उसे इसी स्थान पर स्थापित किया, ताकि उसका दुरुपयोग न हो सके। इसी कारण श्रद्धालु इस मंदिर को अत्यंत सिद्ध और चमत्कारी मानते हैं।
हरि और हर का प्रतीक माना जाता है यह स्थान
मंदिर में स्थापित दोनों शिवलिंगों को भगवान विष्णु (हरि) और भगवान शिव (हर) का स्वरूप माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिव्य मिलन के कारण ही इस स्थान का नाम सिद्धनाथ महादेव पड़ा और यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
ग्रह-नक्षत्र शांति के लिए अन्न से ढंका जाता है शिवलिंग
मंदिर की एक अनूठी परंपरा शिवलिंग को अन्न से ढंकने की है। श्रद्धालु धान, गेहूं, चना, चावल, शक्कर और अन्य अन्न अर्पित कर शिवलिंग को ढंकते हैं। मान्यता है कि इससे ग्रह-नक्षत्रों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होकर सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

राजाओं के समय से जल रही है अखंड ज्योति
सिद्धनाथ महादेव मंदिर में राजाओं के समय से अखंड ज्योति निरंतर प्रज्वलित है। स्थानीय लोग इसे मंदिर की प्राचीन परंपरा और अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक मानते हैं।
महामृत्युंजय मंत्र जाप के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु
पंडित शैलेन्द्र तिवारी ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन महामृत्युंजय मंत्र सहित अनेक वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि विधि-विधान से यहां मंत्र जाप कराने पर रोगों से राहत मिलती है और भगवान शिव की कृपा से कष्ट दूर होते हैं। दूर-दूर से लोग अपने परिजनों के स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए यहां अनुष्ठान करवाने पहुंचते हैं।
सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ती है भारी भीड़
सावन मास, महाशिवरात्रि और अन्य प्रमुख धार्मिक पर्वों पर सिद्धनाथ महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं का विशेष सैलाब उमड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि बड़वानी की प्राचीन धार्मिक विरासत, आस्था और सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।