असम चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका, अखिल गोगोई बोले – “आखिरी कोशिश भी विफल”

असम में होने वाले विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य की प्रमुख पार्टियां चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। इस बीच विपक्षी खेमे में संभावित गठबंधन को लेकर अनिश्चितता बढ़ती दिखाई दे रही है।

कांग्रेस के नेतृत्व में बड़ा विपक्षी गठबंधन बनाने की कोशिशों को झटका लगा है। रायजोर दल के प्रमुख और शिवसागर से विधायक अखिल गोगोई ने सोशल मीडिया पर एक संक्षिप्त पोस्ट करते हुए लिखा— “सर्वश्रेष्ठ चेष्टाएं व्यर्थ” यानी “आखिरी कोशिश भी विफल”। इस पोस्ट के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन की बातचीत शायद ठप पड़ गई है।

एक समय विपक्षी खेमे में करीब 10 पार्टियां शामिल होने की चर्चा थी, लेकिन अब यह गठबंधन मुख्य रूप से चार दलों तक सिमटता नजर आ रहा है। हालांकि कांग्रेस की ओर से अब भी बड़े विपक्षी मोर्चे के गठन की कोशिश जारी बताई जा रही है।

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कांग्रेस सीपीआई (एम), असम जातीय परिषद (AJP) और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस (APHLC) के साथ मिलकर एक मजबूत विपक्षी गठबंधन बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अखिल गोगोई की पार्टी रायजोर दल समेत अन्य दलों के साथ बातचीत जारी है और आने वाले दिनों में गठबंधन और मजबूत हो सकता है।

हालांकि अखिल गोगोई की सोशल मीडिया पोस्ट ने इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी गठबंधन अब तक सीट बंटवारे को अंतिम रूप नहीं दे पाया है, हालांकि कुछ सीटों पर दोस्ताना मुकाबले की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस पहले ही 42 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है।

गठबंधन में शामिल असम जातीय परिषद (AJP) के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई ने कहा कि चारों पार्टियां भारतीय जनता पार्टी को हराने के उद्देश्य से एक साथ आई हैं। वहीं सीपीआई (एम) के राज्य सचिव सुप्रकाश तालुकदार ने इसे “अच्छी शुरुआत” बताते हुए इसे और मजबूत करने की जरूरत बताई।

126 सदस्यीय असम विधानसभा में वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के पास 64 सीटें हैं, जबकि उसके सहयोगी दलों – असम गण परिषद, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट – के पास क्रमशः 9, 7 और 3 विधायक हैं। दूसरी ओर कांग्रेस के पास 26 विधायक हैं, जबकि एआईयूडीएफ के पास 15 और सीपीआई (एम) के पास एक विधायक है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्षी दल एकजुट नहीं हो पाए, तो आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ा लाभ मिल सकता है। फिलहाल असम की राजनीति में गठबंधन को लेकर अनिश्चितता और चर्चाओं का दौर जारी है।

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