आलीराजपुर में रामदेव दशमी मुस्लिम समाज ने संतों का किया स्वागत: भक्तों ने किया तुलादान; 26 हजार श्रद्धालु हुए शामिल

आलीराजपुर। रामदेव दशमी के अवसर पर सोमवार को बाहरपुरा स्थित प्राचीन रामदेव मंदिर में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान रामदेवजी महाराज के दर्शन कर माथा टेका।

रामदेवजी महाराज की भव्य शोभायात्रा में मुस्लिम समाज ने संतों का पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया। पोस्ट ऑफिस चौराहे पर बाहरपुरा मुस्लिम पंच कमेटी ने सदर अलाउद्दीन चंदेरी की अगुवाई में संतों का पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया गया। इसके बाद जामा मस्जिद चौक पर प्रभारी शहर काजी हनीफ मियां के नेतृत्व में मुस्लिम समाज के लोगों ने संतों का अभिनंदन किया।

बच्चों का तुलादान किया 
रामदेव दशमी मेले में सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की कतारें लग गई थीं। गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र सहित मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों से भक्त पहुंचे। बड़वानी, झाबुआ, रतलाम और छोटा उदयपुर क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए। भक्त श्रीफल, मिठाई और फल लेकर भगवान के दर्शन करने पहुंचे। बच्चों की मनोकामना पूरी होने पर माता-पिता ने फल, मिठाई और सूखे मेवों से तुलादान किया।

भगवान के मंदिर पर झंडे चढ़ाए
कट्ठीवाड़ा, अंबवा, नानपुर, सोंडवा और चांदपुर मार्ग से श्रद्धालु झंडा-निशान लेकर पैदल मंदिर पहुंचे। भजन-कीर्तन करते हुए भक्तों ने भगवान के मंदिर पर झंडे चढ़ाए। सनातन सेवा आश्रम के गुरु मंदिर और समाधि स्थल पर भी दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। सुबह 10 बजे से शुरू हुआ भंडारा देर शाम तक चलता रहा। आयोजकों के अनुसार 26 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की।

डोला आकर्षण का केंद्र रहा 
शाम को निकली शोभायात्रा में भगवान रामदेवजी की चलित झांकी, प्रतिमा और डोला आकर्षण का केंद्र रहे। झांकी में रामदेवजी महाराज द्वारा भैरव देवता के वध का प्रसंग दर्शाया गया। युवा भजनों पर नाचते-गाते आगे बढ़े। यात्रा महात्मा गांधी मार्ग, चंद्रशेखर आजाद मार्ग, बाहरपुरा, पोस्ट ऑफिस चौराहा, नीमचौक और बस स्टैंड होते हुए आगे बढ़ी। रास्ते में नरसिंह मंदिर पर डोले की आरती हुई और कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने घरों के सामने पूजा-अर्चना की।

नरसिंहनंदजी के समाधि पर समाप्त हुई यात्रा 
शोभायात्रा अंत में बापू नरसिंहनंदजी के समाधि स्थल पहुंचकर संपन्न हुई। आस्था के इस पर्व में संतों के सम्मान में मुस्लिम समाज द्वारा किया गया स्वागत आलीराजपुर की उस परंपरा को सामने लाया, जहां धार्मिक आस्था के साथ इंसानियत, सम्मान और भाईचारे को भी समान स्थान मिलता है।

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