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आईआईटी इंदौर तैयार कर रहा मेड इन इंडिया एआई चिप, कैमरे, ड्रोन और मेडिकल उपकरण में भी कर सकेंगे इस्तेमाल

जब भी एआई की बात होती है तो हमारी जबान पर सबसे पहला नाम आता है चैट जीपीटी और जेमिनी का। यह दुनिया के बड़े डेटा सेंटर के साथ जुड़े हैं, लेकिन आने वाले समय में एआई सिर्फ बड़े सर्वर तक सीमित नहीं रहेगा। यह मोबाइल, कैमरे, ड्रोन, मेडिकल उपकरण और दूसरी छोटी मशीनों के अंदर भी काम करेगा। इसी दिशा में आईआईटी इंदौर की नेशनल सेमीकंडक्टर डिजाइन एंड कम्प्यूटिंग सिस्टम (एनएसडीसीएस) लैब नई पीढ़ी की स्वदेशी एआई चिप तैयार करने में जुटी है।

एआई चिप के कई महत्वपूर्ण हिस्से तैयार

लैब ने इस एआई चिप के कई महत्वपूर्ण हिस्से तैयार कर लिए हैं। इनमें कम बिजली में काम करने वाला RISC-V प्रोसेसर, मेमोरी, एआई प्रोसेसिंग यूनिट और सुरक्षा से जुड़े मॉड्यूल शामिल हैं। इन सभी मॉड्यूल का सफल टेपआउट (चिप निर्माण से पहले का अंतिम डिजाइन चरण) भारत सरकार की सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी (एससीएल) में किया गया है। अब इनका निर्माण, परीक्षण और एक साथ जोड़कर पूरी चिप तैयार की जाएगी।

छोटे उपकरणों में चला सकेंगे एआई

इस एआई चिप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह छोटे उपकरणों में ही एआई चलाने में सक्षम होगी। यानी हर काम के लिए इंटरनेट या क्लाउड पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। इससे डिवाइस तेजी से फैसले ले सकेंगे, बिजली की खपत कम होगी और डेटा भी ज्यादा सुरक्षित रहेगा। आईआईटी इंदौर की टीम को इसके लिए आईईईई के सम्मेलन के लिए भी चुना गया। इस रिसर्च में ऐसे छोटे और कम बिजली में चलने वाले प्रोसेसर का डिजाइन विकसित किया गया है। यह TinyML तकनीक के जरिए छोटे उपकरणों में एआई चलाने में मदद करेगा।

इम्प्लांटेबल पेसमेकर चिप में भी होगा उपयोग

मेडिकल फील्ड में भी इसका उपयोग किया जाएगा। यही तकनीक भविष्य में इम्प्लांटेबल पेसमेकर चिप (iPACE CHIP) में भी इस्तेमाल की जाएगी। इससे दिल के मरीजों के लिए कम बिजली खर्च करने वाले और लंबे समय तक चलने वाले स्मार्ट मेडिकल उपकरण विकसित किए जा सकेंगे।

तकनीकों में आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी चिप डिजाइन विकसित करना बेहद जरूरी

इस योजना का नेतृत्व आईआईटी इंदौर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. डॉ. संतोष कुमार विश्वकर्मा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत को भविष्य की तकनीकों में आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी चिप डिजाइन विकसित करना बेहद जरूरी है। इस तरह की तकनीक भविष्य में स्मार्ट कैमरे, ड्रोन, रोबोट, मेडिकल उपकरण, ऑटोमोबाइल, औद्योगिक मशीनें और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे कई क्षेत्रों में उपयोगी होगी। यह परियोजना भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के चिप टू स्टार्टअप प्रोग्राम के तहत संचालित की जा रही है।

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