अबूधाबी से 1.28 करोड़ का सोना लाने का आरोप, एयर इंडिया एक्सप्रेस कर्मचारी और कस्टम्स के कार्यकारी सहायक पर भी कार्रवाई

इंदौर। राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर विदेशी सोने की तस्करी के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार अबूधाबी से एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान से 1000.20 ग्राम विदेशी मूल का सोना, जिसकी कीमत करीब 1.28 करोड़ रुपये है, चांदी जैसी धातु की दो चूड़ियों में छिपाकर इंदौर लाया गया था। योजना थी कि विमान से उतरने के बाद एयरोब्रिज पर एयरलाइन कर्मचारी को सोना सौंपकर उसे सीमा शुल्क जांच से बचाते हुए एयरपोर्ट से बाहर निकाल दिया जाए।
डीआरआई ने इस मामले में संजय मुंजे (48), गोविंद पोरवाल (48), वासुदेव बरनाले (32), अमन गहलोत (30) और अजय कुमार सेन (56) को गिरफ्तार किया है। सभी को 5 अगस्त को विशेष आर्थिक अपराध न्यायालय, इंदौर में पेश किया गया। एजेंसी ने आगे की जांच के लिए उन्हें 18 अगस्त तक 14 दिन की न्यायिक हिरासत में रखने का अनुरोध किया है। डीआरआई के अनुसार 3 अगस्त को एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान IX-248 से गोविंद पोरवाल अबूधाबी से इंदौर पहुंचा। उसके पास मौजूद सोना दो चांदी जैसी चूड़ियों में छिपाया गया था। आरोप है कि विमान से उतरने के बाद सीमा शुल्क के आगमन क्षेत्र में पहुंचने से पहले एयरोब्रिज पर यह सोना एयर इंडिया एक्सप्रेस के कर्मचारी वासुदेव बरनाले को सौंपा जाना था। बरनाले को इसे सीमा शुल्क जांच से बचाकर एयरपोर्ट परिसर से बाहर निकालने की जिम्मेदारी दी गई थी।
हर आरोपी की थी अलग भूमिका
डीआरआई के दस्तावेजों के अनुसार इंदौर निवासी संजय मुंजे पूरे नेटवर्क का मुख्य समन्वयक था। वह विदेश से सोना मंगाने, कैरियर तय करने और उसे सुरक्षित तरीके से एयरपोर्ट से बाहर निकलवाने की योजना बनाता था। गोविंद पोरवाल कैरियर के रूप में अबूधाबी से सोना लेकर आया। वासुदेव बरनाले जो एयर इंडिया एक्सप्रेस में कार्यरत है, को एयरोब्रिज पर सोना प्राप्त कर उसे जांच से बचाते हुए बाहर निकालने की जिम्मेदारी दी गई थी। अमन गहलोत जो पहले एयरपोर्ट की हैंडलिंग एजेंसी ऑल इंडिया एयरपोर्ट सर्विसेज में काम कर चुका है, एयरपोर्ट के बाहर सोना प्राप्त कर उसे आगे पहुंचाने वाला था। अजय कुमार सेन जो कस्टम्स में कार्यकारी सहायक है, पर आरोप है कि वह संजय मुंजे और वासुदेव बरनाले के साथ समन्वय स्थापित कर निगरानी संबंधी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराता था, ताकि तस्करी की योजना बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।
निगरानी की सूचना के बदले मिलते थे 10 हजार रुपये
डीआरआई के न्यायालय में पेश दस्तावेजों के अनुसार नेटवर्क से जुड़े लोगों को एयरपोर्ट पर डीआरआई और अन्य एजेंसियों की गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती थी। इसके बदले प्रति यात्रा 10 हजार रुपये का भुगतान किया जाता था। एजेंसी अब बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन, यात्रा रिकॉर्ड और कॉल डिटेल की भी जांच कर रही है।
पहले भी तस्करी के संकेत
डीआरआई का कहना है कि सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 108 के तहत दर्ज बयानों में तस्करी के तरीके और नेटवर्क से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में आरोपियों के पहले भी विदेशी मूल के सोने की तस्करी में शामिल होने के संकेत मिले हैं। एजेंसी पूरे नेटवर्क, धन के स्रोत और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है।
सीमा शुल्क अधिनियम के तहत मामला दर्ज
डीआरआई ने जब्त 1000.20 ग्राम सोने को सीमा शुल्क अधिनियम के तहत जब्ती योग्य मानते हुए आरोपियों के खिलाफ धारा 135(1)(a), 135(1)(b) तथा सहपठित धारा 135(1)(i)(A) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पांचों आरोपियों को 4 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। मामले का अपराध क्रमांक 83/2026 है।