श्रीलंका के राष्ट्रपति बोले: देश का राजनीतिक एजेंडा सांप्रदायिक विभाजन से प्रभावित नहीं होगा

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने स्पष्ट किया है कि देश का राजनीतिक एजेंडा किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक विभाजन से प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने संसद में कहा कि कुछ पराजित राजनीतिक समूह जातीय तनाव भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि विपक्ष के अन्य स्वरूप अपनी राजनीतिक गति खोते दिखाई दे रहे हैं। राष्ट्रपति के अनुसार, हाल की घटनाओं को सांप्रदायिक विवाद के रूप में प्रस्तुत करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सरकार इन प्रयासों को सफल नहीं होने देगी।
रक्षा और लोक सुरक्षा मंत्रालयों के खर्च पर चल रही बहस के दौरान राष्ट्रपति दिसानायके ने त्रिंकोमाली में एक बुद्ध प्रतिमा को लेकर हुए विवाद का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मामले को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई, जबकि अधिकारी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत स्थिति को पहले से संभाल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 2014 के परमिट के बावजूद वह स्थल एक कैंटीन के रूप में संचालित हो रहा था। तट संरक्षण विभाग ने अनधिकृत संरचनाओं को हटाने का आदेश जारी किया था। इसके बाद पर्यावरण मंत्रालय में अपील दायर की गई, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। भिक्षुओं द्वारा अदालत में जाने के लिए मांगी गई समयसीमा 14 नवंबर को समाप्त हो गई, जिसके बाद मामले में कानूनी स्थिति और स्पष्ट हुई।
सुरक्षा कारणों से बुद्ध प्रतिमा को अस्थायी रूप से हटाया गया और बाद में सुरक्षा प्रबंधों के साथ वापस स्थापित कर दिया गया। यह मामला वर्तमान में अदालत के विचाराधीन है, जिसने उचित भूमि सर्वेक्षण पूरा होने तक किसी भी नए निर्माण या विध्वंस पर रोक लगा दी है।
राष्ट्रपति ने कहा कि श्रीलंका की सरकार क्षेत्रीय शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोहराया कि देश का राजनीतिक मार्गदर्शन सांप्रदायिकता से दूर रहेगा और ऐसे किसी भी प्रयास का सख्ती से मुकाबला किया जाएगा।






