ट्रंप के संकेत से तेल कीमतों में गिरावट: ईरान तनाव कम होने से वैश्विक बाजारों को राहत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को दो हफ्तों के लिए टालने के संकेत के बाद वैश्विक तेल बाजारों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस फैसले से ऊर्जा-समृद्ध खाड़ी क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंकाएं कम हुई हैं, जिससे निवेशकों को राहत मिली है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी कच्चे तेल के वायदा भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए, जिससे पिछले कुछ हफ्तों की तेजी पूरी तरह उलट गई। यह बढ़त होरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव के कारण देखी जा रही थी, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है।
ट्रंप ने संकेत दिया था कि अगर ईरान इस रणनीतिक मार्ग को फिर से खोलता है, तो अमेरिका भी सैन्य कार्रवाई से पीछे हटेगा। इस संभावित युद्धविराम ने शेयर बाजारों में भी सकारात्मक असर डाला है, जहां प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों के वायदा 2% से अधिक बढ़ गए। एशियाई बाजारों में भी तेजी देखी गई, जिसमें जापान और दक्षिण कोरिया के प्रमुख इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए।
विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों को पहले से उम्मीद थी कि ट्रंप बातचीत को प्राथमिकता देंगे और समयसीमा बढ़ा सकते हैं। यही वजह है कि हालिया गिरावट को कूटनीतिक समाधान की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, बाजार अब भी सतर्क हैं क्योंकि स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है, ऐसे में किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक बाजारों पर सीधा असर डालती है। भारत जैसे देशों के लिए, जो खाड़ी क्षेत्र से तेल आयात पर निर्भर हैं, कीमतों में यह उतार-चढ़ाव महंगाई और आर्थिक स्थिरता पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दो हफ्तों का यह युद्धविराम पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान मार्ग को खुला रखता है और दोनों पक्ष तनाव नहीं बढ़ाते। फिलहाल, बाजारों को कूटनीति से राहत जरूर मिली है, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।






