भारत ने साइप्रस की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति समर्थन दोहराया — विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर

नई दिल्ली, 29 अक्टूबर 2025।
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह साइप्रस की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता का पूर्ण समर्थन करता है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आज नई दिल्ली में साइप्रस के विदेश मंत्री डॉ. कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में यह बात कही।
बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। डॉ. जयशंकर ने सीमापार आतंकवाद के विरुद्ध साइप्रस के निरंतर समर्थन की सराहना करते हुए कहा कि भारत और साइप्रस हमेशा एक-दूसरे के भरोसेमंद साझेदार रहे हैं।
उन्होंने पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करने और आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ एकजुटता प्रकट करने के लिए साइप्रस सरकार का आभार व्यक्त किया।
डॉ. जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत, साइप्रस के निरंतर समर्थन के लिए आभारी है, जिसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) में भारत की सदस्यता का समर्थन किया है।
उन्होंने बताया कि साइप्रस अगले वर्ष 1 जनवरी से यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता संभालने जा रहा है, जो भारत-साइप्रस संबंधों को एक नई दिशा देगा। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की विदेश नीति में साइप्रस और यूरोपीय संघ के साथ संबंधों को सुदृढ़ बनाना हमेशा प्राथमिकता में रहा है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत और साइप्रस अब “समग्र भागीदारी” (Comprehensive Partnership) के रूप में अपने संबंधों को विकसित कर रहे हैं। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और राष्ट्रमंडल सहित कई क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर एक साथ काम कर रहे हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस वर्ष जून में हुई साइप्रस यात्रा के दौरान “समग्र भागीदारी कार्यान्वयन” पर एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया गया था, जो द्विपक्षीय संबंधों के नए अध्याय की नींव है।
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत और साइप्रस ने मिलकर भारत-साइप्रस संयुक्त कार्य योजना 2025–2029 (India-Cyprus Joint Action Plan 2025–29) तैयार की है, जिसकी समीक्षा आज की बैठक में की गई। यह कार्य योजना रक्षा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, शिक्षा, पर्यटन, और हरित ऊर्जा के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ाने पर केंद्रित है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत साइप्रस के साथ न केवल राजनयिक संबंध बल्कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक शांति की भावना से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि “भारत और साइप्रस के बीच विश्वास, साझेदारी और परस्पर सम्मान पर आधारित संबंध आने वाले वर्षों में और भी सशक्त होंगे।”






