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इंदौर में न्याय, तकनीक और नवाचार पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा — न्याय पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार
“Adjudication से Collaboration” और “Arbitration से Innovation” की ओर बढ़ने का समय – सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्तिगण

📍 इंदौर, 11 अक्टूबर 2025

इंदौर में न्यायधीशों, विधि वेत्ताओं और वैश्विक विशेषज्ञों की दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर “Evolving Horizons: Navigating Complexity and Innovation in Commercial and Arbitration Law in the Digital World” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी का उद्घाटन किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा —

“न्याय पाना देश के हर नागरिक का मौलिक, बुनियादी और संवैधानिक अधिकार है। लोक कल्याणकारी राज्य का पहला दायित्व है कि कोई भी नागरिक न्याय से वंचित न रहे। भारत में न्याय पर मंथन करने की परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है।”

उन्होंने कहा कि तकनीक के इस युग में न्याय और सुशासन की मजबूती राष्ट्र को सशक्त बनाती है। न्यायपालिका की पारदर्शिता, विनम्रता और समय पर निर्णय देना ही उसकी मूल आत्मा है।


सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्तिगण के विचार

  • न्यायमूर्ति श्री जितेन्द्र कुमार महेश्वरी ने कहा — न्यायपालिका का उद्देश्य कानून का पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि निष्पक्षता की सीमाओं का विस्तार करना है।

  • न्यायमूर्ति श्री अहसनुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा — तकनीक आधारित अनुबंधों के दौर में न्याय प्रणाली को भी उसी गति से विकसित होना चाहिए।

  • न्यायमूर्ति श्री राजेश बिंदल ने कहा — आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपयोगी है, पर यह पेटेंट और पंजीकरण जैसे क्षेत्रों में नई चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करता है।

  • न्यायमूर्ति श्री अरविंद कुमार ने कहा — भारत अब वैश्विक अर्थव्यवस्था का सहभागी नहीं, बल्कि शिल्पकार है। न्याय और ‘Ease of Doing Business’ को एक साथ आगे बढ़ना चाहिए।


मुख्य न्यायाधीश और वैश्विक विशेषज्ञों के विचार

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री संजीव सचदेवा ने कहा कि राज्य न्याय एवं तकनीकी नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।

सॉलिसिटर जनरल श्री तुषार मेहता ने कहा —

“कानून तकनीक के साथ विकसित होना चाहिए, लेकिन तकनीक के अधीन नहीं होना चाहिए।”

डेनमार्क की सुश्री मारिया स्काउ, उपमहानिदेशक (डेनिश पेटेंट एवं ट्रेडमार्क कार्यालय), ने भारत–डेनमार्क सहयोग को आवश्यक बताया।


संगोष्ठी की प्रमुख बातें

  • आयोजन: मध्यप्रदेश न्यायिक अकादमी जबलपुर, उच्च न्यायालय इंदौर एवं डेनिश पेटेंट एंड ट्रेडमार्क ऑफिस, डेनमार्क

  • अवधि: 11–12 अक्टूबर 2025

  • कुल तकनीकी सत्र: 6

  • विषय: वाणिज्यिक विधि, इंटरनेट इंटरमीडियरी दायित्व, ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा, बौद्धिक संपदा, नवाचार, भारत–यूरोप मध्यस्थता दृष्टिकोण


नई तकनीकी पहलें लॉन्च

संगोष्ठी में तीन नई न्यायिक तकनीकी पहलें शुरू की गईं —

  1. Online Internship Form Submission Software

  2. Online Communication System of Case Diaries

  3. “समाधान आपके द्वार” (Compoundable Offences हेतु)

इनका परिचय न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने कराया और कार्यक्रम का समापन न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल के आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।

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