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सेंधवा में बारिश से नदी-नाले और बैराजों का जलस्तर बढ़ा: मक्का की फसल खराब हुई; किसानों ने सर्वे की मांग की 

सेंधवा। ब्लॉक में एक महीने के लंबे इंतजार के बाद मानसून एक बार फिर सक्रिय हुआ है। लगातार बारिश के चलते नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने लगा है।

गोई नदी पर बने बैराज भी ओवरफ्लो होकर बह रहे हैं। शनिवार को दिनभर रुक-रुककर कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश होती रही। रविवार सुबह 7 बजे से क्षेत्र में तेज बारिश का सिलसिला जारी रहा।

पिछले 24 घंटे में ब्लॉक के तीन वर्षामापी केंद्रों सेंधवा, चाचरियापाटी और वरला में औसत 31.7 मिमी (1.25 इंच) बारिश दर्ज हुई। सेंधवा में 37 मिमी (1.46 इंच), चाचरियापाटी में 24 मिमी (0.94 इंच) और वरला में 34.2 मिमी (1.35 इंच) बारिश हुई।

मक्का की फसल को नुकसान, किसानों ने सर्वे की मांग की
तेज हवा के साथ हुई बारिश से नागलवाड़ी क्षेत्र के देवनाली, लफनगांव सहित आसपास के इलाकों में खेतों में खड़ी मक्का की फसल को नुकसान पहुंचा है। कई खेतों में फसल जमीन पर गिर गई, जबकि कुछ स्थानों पर खेतों में पानी भरने से फसल खराब होने की स्थिति बन गई है। प्रभावित किसान राजू गणेश, बिसराम, जितेंद्र सहित अन्य किसानों ने अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर फसल नुकसान का सर्वे कराने और शासन से राहत राशि दिलाने की मांग की है।

इस साल अब तक 731.5 मिमी औसत बारिश
एक जून से अब तक सेंधवा में 783.7 मिमी (30.85 इंच), चाचरियापाटी में 665 मिमी (26.18 इंच) और वरला में 745.7 मिमी (29.36 इंच) बारिश दर्ज की गई है। तीनों केंद्रों का औसत 731.5 मिमी (28.80 इंच) है। इसी अवधि में औसत बारिश 775.9 मिमी (30.55 इंच) थी। इस लिहाज से इस बार औसत 44.4 मिमी (1.75 इंच) कम बारिश हुई है। हालांकि लगातार हो रही बारिश से किसानों को बड़ी राहत मिली है। सूखती फसलों को बारिश से नया जीवनदान मिला है, वहीं नदी-नालों और बैराजों में पानी का स्तर भी बढ़ने लगा है।

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