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उज्जैन में 3.5 क्विंटल हल्दी से बनाई गणेश प्रतिमा: 22 फिट है ऊंचाई; हरिद्रा गणेश से सजेगा अवंतिका द्वार

उज्जैन। राजा महाकाल के द्वार पर उनके युवराज 22 फीट ऊंचे हरिद्रा गणेश के स्वरूप में विराजेंगे। महाकालेश्वर इंटरनेशनल चौराहे के इस भव्य आयोजन से महाकाल वन गणेशमय नजर आएगा और श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिलेगा।

गणेश चतुर्थी पर 3.5 क्विंटल खड़ी हल्दी से बनी विशाल प्रतिमा का आगमन होगा। आयोजनकर्ता ऋषभ बाबू यादव बताते हैं कि हर साल गणेश प्रतिमा को अनूठे प्रयोग के साथ तैयार किया जाता है।

मोर पंख, सुपारी, लौंग और इलायची के बाद इस बार हल्दी से हरिद्रा गणेश का स्वरूप बनाया गया है। प्रतिमा का निर्माण तीन महीने पहले इंदौर में शुरू हुआ था।

12 कारीगरों ने किया निर्माण 
कोलकाता से आए 12 कारीगरों ने 22 फीट ऊंची इको-फ्रेंडली प्रतिमा तैयार की। श्रुति आर्ट्स टीम ने डेकोरेशन और कॉन्सेप्ट को अंतिम रूप दिया। आयोजकों का उद्देश्य आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है। समिति सदस्य आकाश वर्मा के अनुसार “महाकाल अवंतिका द्वार पर गणेश उत्सव की परंपरा 55 वर्षों से चली आ रही है. 20 साल से महाकाल वन के युवराज आयोजन ने भव्य रूप ले लिया है।

मोर पंख से हल्दी तक, हर साल बदला स्वरूप
महाकाल वन के युवराज गणेश की सबसे बड़ी खासियत हर साल होने वाला अनोखा प्रयोग है। आकाश वर्मा के अनुसार, 2023 में 9 हजार मयूर पंखों से प्रतिमा बनी, 2024 में सवा लाख सुपारी से स्वरूप तैयार हुआ। वहीं 2025 में लौंग-इलायची से गणेश प्रतिमा बनाई गई, जिसे विशेष पहचान मिली।

वर्ल्ड रिकॉर्ड भी दर्ज हो चूका है नाम
इस आयोजन की गूंज साल 2024 में देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंची थी। तब 1.25 लाख सुपारी से मिट्टी की 21 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा तैयार की गई थी। इसकी भव्यता ने ऐसा आकर्षण पैदा किया कि 17 सितंबर 2024 को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन ने प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। वहीं 11 सितंबर को वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक ऑफ इंडिया ने भी इसे अनोखे गणेश स्वरूप के लिए सम्मान दिया।

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