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JCB-क्रेन भी नहीं हिला पाई खड़े हनुमान: उज्जैन में 10 दिन की कोशिश नाकाम; अब IIT इंदौर बताएगा जमीन के अंदर का राज

उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर का भवन तो हटा दिया गया, लेकिन मंदिर की प्रतिमा को स्थानांतरित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। JCB और क्रेन की मदद से करीब 10 दिनों तक प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली।

अब प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने के लिए IIT इंदौर की विशेषज्ञ टीम की मदद ली जा रही है। टीम ने आधुनिक उपकरणों से प्रतिमा की गहराई और आसपास की जमीन व संरचना की जांच की है। जल्द ही इसकी रिपोर्ट सामने आएगी। रिपोर्ट के आधार पर प्रतिमा को हटाने का तरीका और तारीख तय की जाएगी।

इधर, प्रतिमा के नहीं हिलने की बात भक्तों के बीच आस्था और चमत्कार से जोड़कर देखी जा रही है। स्थानीय श्रद्धालु खड़े हनुमान को ‘डॉक्टर हनुमान’ और मंदिर को ‘उज्जैन का एम्स’ भी कहते हैं।

सिंहस्थ के लिए हो रहा सड़क चौड़ीकरण
उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ मेले का आयोजन होना है। इसके चलते शहर में विकास कार्य और सड़क चौड़ीकरण का काम जारी है। इसी कड़ी में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण किया जा रहा है। सड़क को करीब 15 मीटर चौड़ा किया जाना है। इसकी जद में प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर भी आ रहा है।

प्रतिमा को हटाने के लिए नगर निगम की टीम कटर लेकर पहुंची थी, लेकिन भक्तों ने इसका विरोध किया। श्रद्धालुओं का कहना था कि मशीन से प्रतिमा पर दबाव पड़ने से उसे नुकसान हो सकता है। मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग भी की गई थी। भक्तों ने निगम कमिश्नर को ज्ञापन देकर विशेषज्ञों की निगरानी में प्रतिमा को हटाने की मांग की थी।

IIT की टीम ने दो घंटे तक की जांच
मंगलवार को IIT इंदौर की विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंची। टीम ने करीब दो घंटे तक मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। आधुनिक उपकरणों की मदद से प्रतिमा की गहराई और आसपास की जमीन व संरचना की स्थिति जांची गई। नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा के मुताबिक, विशेषज्ञ टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही प्रतिमा को स्थानांतरित करने की तारीख और प्रक्रिया तय की जाएगी।

पुरातत्व विशेषज्ञ बोले- करीब 1000 साल पुरानी हो सकती है प्रतिमा
विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार, प्रतिमा करीब 1000 साल पुरानी हो सकती है। उनके मुताबिक, इसे प्राचीन काल में प्रचलित इंटरलॉक तकनीक से स्थापित किए जाने की संभावना है।

प्रतिमा मालवा क्षेत्र के बेसाल्ट पत्थर से बनी बताई जा रही है। इसी तरह के पत्थर का इस्तेमाल परमार काल में भी किया जाता था। हालांकि, वर्षों से प्रतिमा पर चढ़ाए जा रहे सिंदूर की मोटी परत के कारण इसकी मूल कलाकृति और भाव-भंगिमा स्पष्ट दिखाई नहीं देती।

प्रतिमा नहीं हिली तो भक्तों ने इसे आस्था से जोड़ा
प्रतिमा को हटाने की कोशिश के दौरान जब वह अपनी जगह से नहीं हिली तो मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। स्थानीय लोगों, पुजारी और हिंदू संगठनों ने इसे आस्था और भगवान का संकेत बताया। मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ कर प्रतिमा को हटाने का विरोध भी किया गया। हालांकि प्रशासन की ओर से प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

‘डॉक्टर हनुमान’ के नाम से भी मानते हैं श्रद्धालु
भक्तों के बीच खड़े हनुमान मंदिर को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं। पुजारी महेश बैरागी के अनुसार, यहां वर्षों से बच्चों को झाड़नी देने और ताबीज बांधने की परंपरा चली आ रही है। श्रद्धालुओं का दावा है कि इससे कई बच्चों के गंभीर रोग ठीक हुए हैं। पुजारी बोले- प्रशासन से विरोध नहीं, प्रतिमा की सुरक्षा जरूरी।

मंदिर के पुजारी का कहना है कि उनका प्रशासन से कोई विवाद नहीं है। उनकी चिंता सिर्फ प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर है। उनका कहना है कि पहले आधुनिक तकनीक से प्रतिमा की स्थिति और उसकी गहराई की जांच की जाए। इसके बाद विशेषज्ञ जिस प्रक्रिया को सुरक्षित मानें, उसी तरीके से प्रतिमा को नई जगह स्थापित किया जाए।

इतिहासकार बोले- वैज्ञानिक जांच के बाद ही निष्कर्ष संभव
इतिहासकार भगवती लाल राजपुरोहित के मुताबिक, खड़े हनुमान मंदिर और प्रतिमा की प्राचीनता को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आ रही हैं। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा जमीन में कितनी गहराई तक है और उसकी वास्तविक स्थिति क्या है, इसका पता विशेषज्ञों के अध्ययन से ही चलेगा। वैज्ञानिक टीम की रिपोर्ट आने से पहले किसी निष्कर्ष पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए फोटो-वीडियो, बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़
मंदिर को हटाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसके फोटो और वीडियो तेजी से वायरल हुए। इसके बाद दूर-दूर से श्रद्धालु खड़े हनुमान के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। स्थानीय निवासी शैलू यादव के मुताबिक, इन दिनों भक्तों को हनुमानजी की विशेष प्रसादी के रूप में सोटे (गदा) बांटे जा रहे हैं।

इसके लिए करीब 10 हजार गदा के आकार की प्रसादी मंगवाई गई है, जिसे श्रद्धालुओं में वितरित किया जा रहा है। अब सभी की नजर IIT इंदौर की विशेषज्ञ टीम की रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि प्रतिमा जमीन में किस तरह स्थापित है और उसे बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रूप से स्थानांतरित करने का तरीका क्या होगा।

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