छात्र को नोटिस देने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: CJI सूर्यकांत बोले- आपकी हिम्मत कैसे हुई; प्रशासन से मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने छात्र को नोटिस देने के मामले में ग्रेटर नोएडा के मजिस्ट्रेट से सवाल किया। CJI सूर्यकांत ने कहा कि जब कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का साफ आदेश दिया था, तो नोटिस कैसे जारी हुआ।

मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के लॉ के दूसरे वर्ष के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। उन्हें 4 सितंबर को नोटिस दिया गया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि वे छात्रों को सरकार विरोधी प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे।

नोटिस में छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपए का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की दो जमानतें देने को कहा गया था। हालांकि, अगले दिन नोटिस वापस ले लिया गया।

CJI बोले- कोई मजिस्ट्रेट आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता
वरिष्ठ वकील विश्वजीत भट्टाचार्य ने यह मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया। उन्होंने बताया कि नोटिस पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर जारी हुआ था। इस पर CJI ने कहा,  उन्होंने कहा कि कोर्ट संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगेगा।

पुलिस की जांच में गलत निकली जानकारी
पुलिस ने बाद में जांच की। इसमें नोटिस का आधार बनी जानकारी गलत पाई गई। यह भी सामने आया कि नोटिस जारी होने के समय अक्षत विश्वविद्यालय में नहीं थे। अक्षत ने बताया कि वे 25 मई को तीन महीने की छुट्टी पर प्रयागराज चले गए थे। उन्होंने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने की बात मानी। लेकिन विश्वविद्यालय में छात्रों को भड़काने के आरोप पर सवाल उठाया।

1 सितंबर के आदेश का दिया हवाला
CJI ने सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के आदेश का हवाला दिया। इस आदेश में जुलाई में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामलों में छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई थी। कोर्ट ने कहा था कि केवल प्रदर्शन में शामिल होना अपराध नहीं माना जा सकता। इसी आदेश के बाद छात्र को नोटिस दिए जाने पर सवाल उठे हैं।

वकील बोले- छात्रों के मन में डर नहीं होना चाहिए
भट्टाचार्य ने कहा कि छात्रों के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कोर्ट से ऐसे मामलों को रोकने की मांग की। CJI ने वकील से सभी तथ्य और दस्तावेज कोर्ट में रखने को कहा। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

हाईकोर्ट भी जता चुका है नाराजगी
इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट भी गौतमबुद्ध नगर प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जता चुका है। कोर्ट ने एक अन्य छात्र कार्यकर्ता के खिलाफ हिरासत की कार्रवाई को रद्द किया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि प्रशासन को संविधान के अनुसार काम करना चाहिए। कोर्ट ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे।

Share