रीवा कलेक्टर बोले- गंदगी दिखी तो 12 बजा दूंगा: ये अस्पताल है या कूड़ादान; इलाज के स्थान को बना रखा है पिकनिक स्पॉट

रीवा। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी पूरी टीम के साथ अचानक आधी रात को मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करने पहुंचे। वहां की अव्यवस्थाओं को देखकर कलेक्टर ने अस्पताल के सफाई कर्मचारी से लेकर अटेंडर को फटकार लगाई और कार्रवाई की चेतावनी दी।
निरीक्षण के समय आयुक्त नगर निगम अक्षत जैन, मुख्य कार्य पालन अधिकारी जिला पंचायत समिति सृष्टि देशमुख, एसडीएम डॉ अनुराग तिवारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप मिश्रा और चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे।
गंदगी के लिए लगाई फटकार
कलेक्टर ने सबसे पहले इमरजेंसी वार्ड के बाहर गंदगी को लेकर स्टाफ को डांट लगाई। उन्होंने कहा आज तो मैंने सिर्फ ऊपरी तौर पर चेकिंग की है। इसके बाद जब मैं आऊँगा तो देखूंगा कि तकिये कैसे है, चादर कैसे है, तौलिए कैसे है और डॉक्टर मौजूद है या नहीं।

कलेक्टर बोले- ये कोई लूट मचाने का संस्थान नहीं
इसके बाद कलेक्टर ने अटेन्डर को फटकार लगाते हुए कहा कि आपके पास 300 मरीज आए लेकिन आपने सिर्फ 190 के आवेदन लिए है। मैं आपके साथ पूरी कार्रवाई करूंग, याद रखना। यह गवर्मेंट का पैसा है, कोई लूट मचाने का संस्थान नहीं है।
यह अस्पताल है कि कचरा खाना?
फिर सफाई प्रमुख को बुलाकर उन्होंने कहा कि यह अस्पताल है कि कचरा खाना? मुझे कल से यहां कुछ भी गंदगी और अव्यवस्था नहीं दिखनी चाहिए। मैं सुबह 6 बजे या रात को 2 बजे भी चेकिंग करने आ सकता हूं। अगर मुझे कर्मचारी नहीं दिखे या अव्यवस्था मिली तो तुरंत कार्रवाई होगी। उन्होंने प्रभारी डीन डॉक्टर मनोज इंदुरकर को रोगी के साथ केवल एक अटेंडेंर के रहने की अनुमति देने और साफ-सफाई रखने के निर्देश दिए।

किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं
कलेक्टर ने बताया कि कमिश्नर नगर निगम, एसपी सर और जिला पंचायत के साथ हमने मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया और इस दौरान कई अव्यवस्थाएं मिली। अस्पताल प्रशासन को हमने निर्देश दिया है कि किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कॉलेज सुपरेटेंडनेट की जिम्मेदारी है कि वह व्यवस्था बनाए रखे और अगर इसके लिए उन्हे प्रशासन से कोई सहायता चाहिए तो वह भी दी जाएगी।
इंचार्ज की 7 दिन की सैलरी काटी
कलेक्टर ने कहा की सुरक्षा के इंचार्ज इस बात पर विशेष ध्यान दें कि वार्ड में कोई भी व्यक्ति बिना पर्मिशन के ना आए। रोगियों से मिलने का समय निर्धारित हो और उस समय में ही अटेंडर को रोगी के पास जाने दें । कलेक्टर ने ऑर्थोपेडिक्स वार्ड में पुराने गद्दों के खुले में पड़े होने पर इंचार्ज का 7 दिन की सैलरी काटने के निर्देश दिए।