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झाबुआ के मेघनगर में प्रदूषित पानी की जांच: 2 सम्प का काम 7 दिन में पूरा करने के निर्देश; झायड़ा और अनास नदी की व्यवस्था देखी

झाबुआ। औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले प्रदूषित पानी के प्रभाव का मैदानी स्तर पर आकलन करने और समस्या के स्थायी समाधान की कार्ययोजना तैयार करने के लिए कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट और एसपी देवेंद्र पाटीदार ने शनिवार को मेघनगर और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया।

2 कॉमन एफ्लुएंट सम्प का लिया जायजा
कलेक्टर-एसपी ने औद्योगिक इकाइयों से नालों में पहुंच रहे प्रदूषित पानी को एकत्र कर उपचारित करने की व्यवस्था देखी। इस दौरान निर्माणाधीन दो कॉमन एफ्लुएंट कलेक्शन सम्प का निरीक्षण किया गया। इन सम्प के जरिए औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले एफ्लुएंट को एकत्र कर कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) तक पहुंचाया जाएगा।

कलेक्टर ने AKVN अधिकारियों को दोनों सम्प का बचा हुआ निर्माण और जरूरी कनेक्शन 7 दिन में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि काम प्राथमिकता के साथ तय समय सीमा में पूरा किया जाए, ताकि प्रदूषित पानी नालों में जाने से रोका जा सके।

झायड़ा के नाले और इंटेक वेल की स्थिति देखी
इसके बाद अधिकारियों ने झायड़ा क्षेत्र में प्रदूषित पानी से प्रभावित नाले का निरीक्षण किया। प्रदूषित पानी के स्रोत, प्रवाह और आसपास के क्षेत्र पर पड़ रहे प्रभाव की जानकारी ली। झायड़ा स्थित इंटेक वेल का भी जायजा लिया गया।

कलेक्टर ने झायड़ा के हैंडपंप के पानी की स्थिति भी देखी और स्वयं पानी पीकर जांच की। पानी स्वच्छ पाया गया। उन्होंने अधिकारियों को क्षेत्र में पेयजल की गुणवत्ता की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए।

अनास नदी की जल प्रदाय व्यवस्था भी देखी
कलेक्टर और एसपी ने अनास नदी पर स्थित AKVN की जल प्रदाय व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। उन्होंने जल प्रदाय की वर्तमान स्थिति और संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

कलेक्टर ने कहा कि निरीक्षण का उद्देश्य प्रदूषित पानी के प्रभाव की वास्तविक स्थिति समझने के साथ ही इसके प्रभावी और लंबे समय के समाधान के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना है। उन्होंने संबंधित विभागों और एजेंसियों को आपसी समन्वय से काम कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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