रक्षाबंधन पर क्रिकेट की खास कहानी: बहन ने उधार लेकर दिलाया था भाई को पहला बल्ला; अब भारत के खिलाफ मचा रहा धमाल

स्पोर्ट्स डेस्क। आज रक्षाबंधन है। ऐसे में क्रिकेट जगत से जुड़ी एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसमें बहन की छोटी सी पहल ने भाई की जिंदगी बदल दी। श्रीलंका के युवा क्रिकेटर सोनल दिनुशा को पहला क्रिकेट बल्ला उनकी बहन ने दिलाया था। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसके बावजूद बहन ने पैसे उधार लेकर भाई के लिए बल्ला खरीदा।
आज वही दिनुशा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुके हैं। भारत के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। दो टेस्ट की सीरीज में दिनुशा ने तीन शतकों की मदद से 420 रन बनाए।
बहन ने उधार लेकर खरीदा था पहला बल्ला
दिनुशा के भरोसेमंद कोच अशान प्रियंजन ने बताया कि दिनुशा को शुरुआत में बास्केटबॉल में दिलचस्पी थी। वह इस खेल का भी खूब अभ्यास करते थे। बाद में स्कूल के कोच सुसंथा फेलिक्स डियास ने उन्हें क्रिकेट खेलते देखा। कोच ने उनकी प्रतिभा पहचानी और क्रिकेट टीम में शामिल कर लिया। उस समय दिनुशा के पास बल्ला और क्रिकेट का अन्य सामान तक नहीं था।
परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी। ऐसे में उनकी बहन ने कुछ पैसे उधार लिए और भाई के लिए पहला क्रिकेट बल्ला खरीदा। यही बल्ला दिनुशा के क्रिकेट सफर की पहली बड़ी शुरुआत बना।
भारत के स्पिनरों के खिलाफ दिखाया कमाल
भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले दिनुशा ने अपने कोच अशान प्रियंजन से फोन पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि भारत के पास कई अच्छे स्पिन गेंदबाज हैं। इसलिए अच्छी तैयारी करनी होगी।
उनकी तैयारी का असर मैदान पर भी दिखाई दिया। दिनुशा ने रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार और सारांश जैन जैसे भारतीय स्पिनरों के खिलाफ शानदार स्वीप शॉट खेले। उन्होंने स्पिनरों के खिलाफ खुलकर बल्लेबाजी की। भारत के खिलाफ दोनों टेस्ट में उनका प्रदर्शन शानदार रहा।
दो टेस्ट में बनाए 420 रन
दिनुशा ने गॉल और कोलंबो टेस्ट में कुल 420 रन बनाए। इनमें 173 रन उन्होंने स्वीप शॉट के जरिए बनाए। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने एक टेस्ट सीरीज में स्पिन के खिलाफ स्वीप शॉट से सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में इंग्लैंड के जो रूट को पीछे छोड़ दिया। रूट ने एक सीरीज में स्पिन के खिलाफ स्वीप शॉट से 160 रन बनाए थे।
दो घंटे सिर्फ स्वीप शॉट की प्रैक्टिस
कोच प्रियंजन के मुताबिक दिनुशा बेहद मेहनती क्रिकेटर हैं। उन्होंने बताया कि दिनुशा जब 11-12 साल के थे, तभी उनमें क्रिकेट के प्रति गजब का उत्साह और समर्पण दिखाई देता था। कोच ने एक बार उन्हें स्पिनरों के खिलाफ सफल होने के लिए स्वीप शॉट पर काम करने की सलाह दी थी। इसके बाद दिनुशा ने करीब दो घंटे तक नेट्स में सिर्फ स्वीप शॉट का अभ्यास किया।
यही मेहनत अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दिखाई दे रही है। भारत के खिलाफ शानदार प्रदर्शन के बाद दिनुशा ने साबित कर दिया कि प्रतिभा के साथ मेहनत और परिवार का साथ हो तो मुश्किल हालात भी रास्ता नहीं रोक सकते।
मैच के बाद भी अभ्यास की चाहत
दिनुशा के खेल के प्रति समर्पण का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत के खिलाफ मैच में शानदार प्रदर्शन के कुछ ही घंटे बाद वह दोबारा नेट्स पर अभ्यास करना चाहते थे। उनके लिए जश्न से ज्यादा क्रिकेट मायने रखता है। कठिन परिस्थितियों से निकलकर क्रिकेट को अपना रास्ता बनाने वाले दिनुशा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन की ओर बढ़ रहे हैं।
रक्षाबंधन के मौके पर उनकी कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर की सफलता की कहानी नहीं है। यह उस बहन के भरोसे की कहानी भी है, जिसने आर्थिक मुश्किलों के बावजूद भाई के सपने को पूरा करने के लिए अपना योगदान दिया। आज उसी पहले बल्ले से शुरू हुआ सफर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंच चुका है।