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इंदौर में फर्जी डॉक्टर पर इलाज के आरोप: जनसुनवाई में शिकायत; अब तक दो से ज्यादा मरीजों की मौत

इंदौर। महू तहसील के बड़गोंदा के पास बीसी बसाई गांव में बिना सक्षम डिग्री के लकवा मरीजों का इलाज करने के आरोप में सज्जन सिंह पवार के खिलाफ शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसके इलाज के बाद अब तक दो से ज्यादा मरीजों की मौत हुई है। मामले की शिकायत मंगलवार को इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा की जनसुनवाई में की गई। कलेक्टर ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

पिता की मौत के बाद बेटे ने की शिकायत
सांवेर के चंद्रावतीगंज निवासी शाहरुख हुसैन ने कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत की। उन्होंने बताया कि करीब एक महीने पहले उनके पिता को ब्रेन से जुड़ी परेशानी हुई थी। इलाज के बाद उनकी हालत ठीक हो गई थी। इसके बाद किसी के कहने पर वे पिता को लकवा का इलाज कराने के लिए सज्जन सिंह पवार के पास लेकर गए।

शाहरुख के मुताबिक, वहां उनके पिता को ‘स्ट्राइड’ नाम का इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई। परिवार ने इलाज को लेकर सवाल उठाते हुए सज्जन पवार के खिलाफ बड़गोंदा थाने में भी शिकायत की।

शाहरुख का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य विभाग सहित करीब 30 स्थानों पर शिकायत भेजी, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मंगलवार को उन्होंने कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत की।

एक अन्य महिला की मौत का भी आरोप
इसी तरह का एक अन्य मामला इंदौर के वार्ड 74 से भी सामने आया है। वार्ड 74 के पार्षद पति सुनील हार्डिया ने आरोप लगाया कि वह अपनी काकी का लकवा का इलाज कराने सज्जन पवार के पास लेकर गए थे।

इलाज के बाद उनकी काकी की भी मौत हो गई। इस मामले को लेकर भी भंवरकुआं थाने में शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। परिजनों ने इलाज के तरीके और डॉक्टर की योग्यता को लेकर जांच की मांग की है।

मरीजों के इलाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच
शिकायत के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से डॉक्टर की शैक्षणिक योग्यता, इलाज करने की वैध अनुमति और मरीजों के इलाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अवैध रूप से संचालित चिकित्सा गतिविधि को बंद कराया जाएगा। फिलहाल मामले में जांच शुरू होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित व्यक्ति के पास इलाज करने की वैध योग्यता और अनुमति थी या नहीं तथा मरीजों की मौत और किए गए इलाज के बीच कोई चिकित्सकीय संबंध था या नहीं।

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