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महाकाल मंदिर के सामने 65 साल पुराना भवन जमींदोज, श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए फैसला

उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल मंदिर के ठीक सामने स्थित करीब 65 साल पुराना परचुरे भवन बुधवार देर रात इतिहास बन गया। लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए नगर निगम ने उच्च न्यायालय के आदेश पर इस ‘जी प्लस वन’ (दो मंजिला) जर्जर ढांचे को ध्वस्त कर दिया। बाबा महाकाल की शयन आरती संपन्न होने के बाद रात करीब 11 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर गरज उठे और महज एक घंटे में पूरा भवन जमींदोज कर दिया गया।

नगर निगम के अधीक्षण यंत्री प्रमोद मालवीय के अनुसार, 1200 से 1500 वर्गफीट में बना यह भवन बिना आरसीसी ढांचे के ओपन फाउंडेशन पर टिका था। भोपाल की प्रतिष्ठित तकनीकी संस्था मैनिट (MANIT) की विशेषज्ञ टीम ने इस इमारत की बारीकी से जांच की थी। रिपोर्ट में पाया गया कि:

  1. दीवारों में झुकाव: भार सहने वाली मुख्य दीवारों में गहरी दरारें और स्पष्ट झुकाव आ चुका था।
  2.  कमजोर गर्डर: छत को सहारा देने वाले स्टील गर्डर जंग लगने के कारण बेहद कमजोर हो चुके थे।
  3. सीलन और जर्जर सीढ़ियां: छत की हालत काफी खराब थी, जगह-जगह सीलन भरी थी और सीढ़ियां भी पूरी तरह जर्जर हो चुकी थीं।

सवारी के दौरान बड़े हादसे का बना था खतरा

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भगवान महाकाल की सवारी और प्रमुख त्योहारों के दौरान इस मार्ग पर हजारों-लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है। ऐसी स्थिति में जर्जर भवन की छत या ऊपरी मंजिल पर भीड़ एकत्र होने से इमारत पर दबाव बढ़ सकता था, जिससे किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता था। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया गया।

मंदिर विस्तारीकरण के दूसरे चरण से भी जुड़ा मामला

सूत्रों के अनुसार, परचुरे भवन को हटाने की यह कार्रवाई महाकाल मंदिर परिसर के दूसरे चरण के विस्तारीकरण कार्य से भी सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। भवन ध्वस्त होने के बाद अब इस क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित कर श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही के लिए मार्ग और चौड़ा किया जा सकेगा।

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