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EXCLUSIVE: इंदौर नामांतरण घोटाले में नामजद FIR: निगम के 2 कर्मचारी बर्खास्त; 2 निलंबित!

आदित्य शुक्ला। इंदौर। नगर निगम के राजस्व विभाग में करीब 350 संपत्तियों के नामांतरण के मामले की जांच पूरी हो गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर निगमायुक्त ने कंप्यूटर ऑपरेटर सागर पंवार के खिलाफ साइबर क्राइम को नामजद FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

इसके अलावा दो आउटसोर्स कर्मचारियों को बर्खास्त और दो स्थाई कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। मामला सामने आने के बाद निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई थी।

इसमें अपर आयुक्त आकाश सिंह, अपर आयुक्त एवं स्मार्ट सिटी सीईओ अर्थ जैन और आईटी विभाग के कपिल गेहलोत को शामिल किया गया था। जांच में सामने आया कि राजस्व विभाग के उपायुक्त केशव सगर और प्रदीप जैन की आईडी का इस्तेमाल कर कंप्यूटर ऑपरेटर सागर पंवार द्वारा करीब 350 संपत्तियों का नामांतरण किया गया।

50 से ज्यादा संपत्तिधारकों से की गई चर्चा
मामला सामने आने के बाद निगम की ओर से 50 से अधिक संपत्तिधारकों को नोटिस जारी किए गए। अपर आयुक्त आकाश सिंह ने खुद संपत्तिधारकों से चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी ली।

इसके बाद आईटी विभाग ने ई-पोर्टल पर पूरे रिकॉर्ड की जांच की। जांच के दौरान मुख्यालय के ई-पोर्टल पर पुराने रिकॉर्ड नहीं मिलने के बाद मामले की आगे जांच के लिए शासन स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई।

जांच के बाद कंप्यूटर ऑपरेटर पर FIR के निर्देश
जांच पूरी होने के बाद नगर निगम ने कंप्यूटर ऑपरेटर सागर पंवार के खिलाफ साइबर क्राइम को नामजद FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। निगम स्तर पर की गई कार्रवाई के बाद मामले में पुलिस जांच भी आगे बढ़ेगी।

दो आउटसोर्स कर्मचारी बर्खास्त
मामले में निगम ने दो आउटसोर्स कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की है। संतोष मालवीय और सौरभ तिवारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

दो स्थाई कर्मचारी निलंबित
इसके अलावा निगम के दो स्थाई कर्मचारियों रियाज अंसारी और संजय यादव को निलंबित किया गया है। नामांतरण मामले में जिम्मेदारी तय करने के बाद निगम ने यह कार्रवाई की है।

दो उपायुक्त पहले ही हटाए जा चुके
इस मामले में उपायुक्त प्रदीप जैन और केशव सगर को पहले ही उनके पद से हटा दिया गया था। उनकी जगह नई उपायुक्त गरिमा पाटीदार की तैनाती की गई है। यह मामला सामने आने के बाद नगर निगम के राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। अब जांच पूरी होने के बाद निगम ने संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की है।

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