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भारत में मजबूत होगा डिफेंस एमआरओ इकोसिस्टम, मर्लिनहॉक एयरोस्पेस और बोइंग डिफेंस इंडिया की साझेदारी

भारत के रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा देने की दिशा में मर्लिनहॉक एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड और बोइंग डिफेंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने सामरिक साझेदारी की है। इस समझौते के तहत भारत में तैनात एडवांस्ड इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड सिस्टम के लिए देश के भीतर ही रखरखाव, मरम्मत और लाइफसाइकिल सपोर्ट उपलब्ध कराया जाएगा।

मर्लिनहॉक एयरोस्पेस बैंगलुरु स्थित अपने एल3 हैरिस वेस्कैम ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर के माध्यम से एडवांस्ड सिस्टम के रखरखाव, तकनीकी सहयोग और लाइफसाइकिल सस्टेनमेंट सेवाएं प्रदान करेगी। इस पहल से भारतीय रक्षा बलों को स्थानीय स्तर पर तेज और प्रभावी तकनीकी सहायता मिलेगी, जिससे उपकरणों की उपलब्धता बढ़ेगी, मरम्मत का समय कम होगा और मिशन की तैयारियों को मजबूती मिलेगी।

टर्नअराउंड टाइम घटेगा और फ्लीट की उपलब्धता बढ़ेगी

बोइंग डिफेंस इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर निखिल जोशी ने कहा कि भारतीय नौसेना का P-8I बेड़ा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सिस्टम के लिए घरेलू सपोर्ट उपलब्ध कराने हेतु मर्लिनहॉक के साथ यह साझेदारी आत्मनिर्भर भारत और मजबूत रक्षा इकोसिस्टम बनाने की बोइंग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इससे टर्नअराउंड टाइम घटेगा, फ्लीट की उपलब्धता बढ़ेगी और मिशन की तैयारी बेहतर होगी।

लाइफसाइकिल के साथ एयरोस्पेस सस्टेनमेंट क्षमताएं विकसित होगी

मर्लिनहॉक एयरोस्पेस के सीईओ कार्तिक रामिनेनी ने कहा कि आधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म में उन्नत तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच देश में ही तेज और विश्वसनीय लाइफसाइकिल सपोर्ट उपलब्ध कराना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बोइंग डिफेंस इंडिया के साथ यह साझेदारी भारत में विश्वस्तरीय एयरोस्पेस सस्टेनमेंट क्षमताएं विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सर्विस रिस्पॉन्स तेज होगा, डाउनटाइम कम होगा और भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान के साथ-साथ देश को वैश्विक एयरोस्पेस एमआरओ हब के रूप में मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।

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