खामेनेई के अंतिम संस्कार पर ट्रंप की बड़ी चेतावनी, जानें 4 जुलाई क्यों चुना गया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है। उन्होंने कहा कि वे दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान देश के बचे हुए नेतृत्व को सिर्फ एक शॉट में खत्म कर सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि वो ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचेगा। अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हमले में हुई मौत के बाद मार्च से ही अंतिम संस्कार के समय को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। आमतौर पर इस्लामिक नियमों के अनुसार मृतक को आदर्श रूप से 24 घंटे के भीतर दफनाया जाना चाहिए, लेकिन युद्ध की स्थिति के कारण यह उस वक्त संभव नहीं हो सका।
4 जुलाई का दिन क्यों चुना?
ईरान ने खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू करने के लिए 4 जुलाई का दिन चुना, जो अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ है। अंतिम संस्कार की रस्मों के तहत 7 जुलाई को तेहरान के दक्षिण में स्थित पवित्र शहर कोम में कार्यक्रम और अन्य धार्मिक आयोजन होंगे। यह प्रक्रिया 9 जुलाई को उनके गृह नगर मशहद में खामेनेई को दफनाने के साथ पूरी होगी।
नहीं शामिल होंगे बेटे मुज्तबा
भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई के प्रतिनिधि ने कहा है कि सुरक्षा कारणों के चलते वो अपने पिता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्मों में शामिल नहीं होंगे।
इमाम रजा की दरगाह में दफनाया जायेगा खामेनेई को
शिया संप्रदाय के कुल 12 पवित्र इमामों में से इमाम रजा एकमात्र ऐसे इमाम हैं जिन्हें ईरान की धरती पर दफनाया गया है। बाकी के सभी इमाम या तो सऊदी अरब मदीना में हैं या इराक नजफ, करबला, सामर्रा में। जहां इमाम रजा को दफनाया गया, उस जगह का नाम बाद में ‘मशहद’ पड़ गया, जो आज ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। मशहद शिया मुसलमानों के लिए मक्का, मदीना और करबला के बाद सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। यहां हर साल दुनिया के कई देशों से लाखों शिया श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।