राम मंदिर में चोरी पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा दावा, बोले- यह कोई नई बात नहीं
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी ने दावा किया कि राम मंदिर में चोरी कोई नई बात नहीं है। वहां चोरी तो बहुत पहले से ही चोरी हो रही है। गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर जनजागरण अभियान चला रहे ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बागपत के बड़ौत पहुंचे। जहां उन्होंने गौ संरक्षण को लेकर लोगों से आगे आने की अपील की। इस दौरान उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्थाओं और सनातन परंपरा को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि वहां तो पहले से ही चोरी हो रही है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जब बड़ौत के कोताना रोड स्थित सर्व समाज उत्थान समिति के कार्यालय पहुंचे तो समाज के लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि गौमाता सिर्फ आस्था का विषय नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार हैं।
गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की माँग
शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए वह प्रदेशभर में जनजागरण यात्रा निकाल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अब तक करीब 200 विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों से संवाद कर चुके हैं। उन्होंने कहा हम लोगों को प्रेरित कर रहे हैं कि इस बार के चुनाव में गो माता की रक्षा के लिए मतदान कीजिए और गौ माता कहने के लिए दबाव डालिए।
राम मंदिर में चोरी के सवाल पर कही ये बात
अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी से जब राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि राम मंदिर में चोरी कोई नई बात नहीं है। आप लोगों ने इसे अब उठाया है लेकिन, वहां चोरी तो बहुत पहले से हो रही है। पूत के लक्षण पालने में दिख जाते हैं। जब वहां मंदिर बनना था, कोई भी काम होता तो विशेषज्ञों को बुलाया जाता है।
वहां मंदिर बनाने के लिए चार शंकराचार्य और 13 अखाड़ों के प्रमुख पहले से तैयार थे लेकिन, उनको हटा दिया और अपने ख़ास लोगों को ट्रस्ट में रखा गया, जब आप अपने खास आदमी ट्रस्ट में रखते हैं तो इसका मतलब है कि ऐसा इसलिए हुआ कि वो अपने काम कर सकें। उसी समय पता चल गया कि चोरी होने वाली है।
सनातन परंपरा और राजनीतिक हिंदुत्व के सवाल पर उन्होंने कहा कि दोनों को अलग-अलग नजरिए से समझने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि उनका अभियान किसी विवाद के लिए नहीं बल्कि समाज को जागरूक करने और भारतीय संस्कृति की रक्षा के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
