भोपाल ATS की बड़ी कार्रवाई: ‘लोन वुल्फ’ मॉड्यूल का संदिग्ध गिरफ्तार, पाकिस्तान से कनेक्शन के आरोप
मध्य प्रदेश. ATS ने भोपाल एक कट्टरपंथी मॉड्यूल खुलासा किया है। बताया जा रहा है कि जिसके तार सीधे पाकितान , डार्क एप्स , जिहादी साहित्य , मार्शल आर्ट्स ट्रेनिंग और अफगानिस्तान तक जुड़े है। पुराने भोपाल के काजी कैप इलाके से गिरफ्तार हुआ 35 वर्षीय युवक जिसका नाम मोहम्मद फ़राज़ जिसको एजेंसी एक अहम कड़ी मान रही है ,कथित तौर पर लोन वुल्फ हमलों के लिए तैयार किया जा रहा था। सूत्रों के मुताबिक इस ग्रुप का हैंडलर पाकिस्तान में बैठा हुआ था। इनके निर्देश साफ़ थे। हतियार खरीदों , तैयार रहो और जरुरत पढ़ने पर विदेश जाने के लिए भी तैयार खड़े रहो। जांच एजेंसियों के मुताबिक उन्हें शक है कि इस नेटवर्क से जुड़े युवाओं को जिहाद के नाम पर लड़ाई के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी थी। इन युवाओं को मिलिशिया ट्रेनिंग दी जा रही है जिसके बाद दुनिया के दूसरे देशो में जाकर जिहाद के लिए काम करें।
जानकारी के अनुसार भोपाल से पकड़ाए फराज वहां एक डॉक्टर के क्लीनिक पर काम करता था। बाहर से सामान्य जिंदगी, लेकिन मोबाइल और ऑनलाइन गतिविधियों में एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले हैं, जिनके आधार पर उसकी गहन जांच की जा रही है। ATS का दावा है कि वह कथित तौर पर स्पेशल ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान जाने की तैयारी में था।
पाकिस्तान से भेजी गई कथित जिहादी दस्तावेजी PDF फाइलें
MP ATS के IG डॉ. आशीष ने बताया, “मोहम्मद फराज, जो पुराने भोपाल के काजी कैंप इलाके का रहने वाला है, उसे MP ATS ने गिरफ्तार कर विशेष अदालत में पेश किया। अदालत ने उसे विस्तृत पूछताछ के लिए 16 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।”
मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी और डार्क ऐप्स भी इस्तेमाल
सूत्रों के अनुसार फराज सिर्फ डिजिटल कट्टरपंथी सामग्री तक सीमित नहीं था। वह मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी ले रहा था। एजेंसियों को शक है कि वह कुछ डार्क ऐप्स के जरिए संदिग्ध ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच में प्रारंभिक तौर पर गाजा के समर्थन में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी सामने आने की बात कही जा रही है।
ATS के मुताबिक यह कार्रवाई खास इनपुट के आधार पर की गई। एजेंसी को सूचना मिली थी कि फराज एक पाकिस्तानी व्हाट्सअप ग्रुप से जुड़ा हुआ है और सीमा पार बैठे हैंडलर के निर्देश पर मध्य प्रदेश सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
पूछताछ में फराज ने कथित तौर पर बताया कि वह पिछले 5-6 साल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के संपर्क में था। ATS का दावा है कि नईम ने ही फराज को पाकिस्तानी हैंडलर से जोड़ा, इसके बाद फराज धीरे-धीरे इस नेटवर्क में गहराई तक उतरता चला गया।
जांच एजेंसी के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर ने फराज को कथित तौर पर जिहाद के लिए उकसाया। उसे बताया गया कि भारत में कई युवाओं को पहले ही तैयार किया जा चुका है और अब उसे भी इसी काम के लिए खुद को तैयार करना होगा। ATS सूत्रों का दावा है कि फराज इस कदर कट्टरपंथी हो चुका था कि वह हैंडलर के किसी भी आदेश को अंजाम देने के लिए तैयार था। शुरुआती पूछताछ में फराज ने कथित तौर पर बताया कि वह टेलीग्राम और व्हाट्सअप के जरिए भारत, पाकिस्तान और दूसरे देशों के कई संदिग्ध कट्टरपंथी समूहों से जुड़ा हुआ था। जांच में यह भी सामने आया है कि नईम अब्दुल्ला ने उसे मारे गए पाकिस्तानी आतंकी खालिद सैफुल्लाह का नाम इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया था।
युवाओं को टारगेट किलिंग और लोन वुल्फ हमलों के जरिए
ATS का दावा है कि इस नेटवर्क से जुड़े युवाओं को टारगेट किलिंग और लोन वुल्फ हमलों के जरिए दहशत फैलाने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा था। उन्हें पासपोर्ट बनवाने को कहा गया था, ताकि आगे चलकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान या पश्चिम एशिया जाकर कथित आतंकी प्रशिक्षण लिया जा सके।
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तानी हैंडलर ने फराज और इस ग्रुप से जुड़े अन्य युवाओं को प्रतिबंधित संगठन PFI के कथित Mission 2047 एजेंडे की ओर भी धकेलने की कोशिश की। आरोप है कि फराज से शपथ दिलवाई गई और लोकतांत्रिक व्यवस्था को न मानते हुए हथियारबंद संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा गया। इस मामले में भोपाल के STF थाने में मोहम्मद फराज और देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के खिलाफ BNS की धारा 152 और UAPA की धारा 13(1)(B) और 18 के तहत केस दर्ज किया गया है। नईम अब्दुल्ला की तलाश जारी है।
भोपाल पुलिस को भी इस नेटवर्क की जानकारी नहीं थी
आरोपी की गिरफ्तारी और पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई। सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन की जानकारी भोपाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय पुलिस तक को नहीं दी गई थी। ATS ने गिरफ्तारी से लेकर पूछताछ तक पूरे ऑपरेशन को बेहद सीमित दायरे में रखा।
अब ATS और अन्य एजेंसियां इस कथित पैन-इंडिया नेटवर्क की पूरी कुंडली खंगाल रही हैं। फराज के फोन, चैट, सोशल मीडिया अकाउंट, पासपोर्ट, विदेशी संपर्कों, देवबंद लिंक, डार्क ऐप्स और स्थानीय संपर्कों की जांच की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भोपाल से पकड़ा गया फराज सिर्फ एक कट्टरपंथी युवक था या फिर सीमा पार से रिमोट कंट्रोल हो रहे एक बड़े इंटरस्टेट मॉड्यूल का हिस्सा। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में देश के किन-किन शहरों से युवा जुड़े थे और क्या कोई बड़ा हमला अंजाम देने की तैयारी जमीन तक पहुंच चुकी थी। फराज फिलहाल 16 जून तक ATS रिमांड पर है। पूछताछ में एजेंसी के सामने तीन बड़े सवाल हैं। पाकिस्तान में बैठा हैंडलर कौन है, इंटरस्टेट ग्रुप में कितने लोग जुड़े हैं और क्या लोन वुल्फ हमलों की तैयारी सिर्फ मोबाइल स्क्रीन तक थी या उससे आगे भी बढ़ चुकी थी।