IMA पासिंग आउट परेड: 481 जेंटलमैन कैडेट बने सेना अधिकारी, राष्ट्रपति मुर्मु ने ली सलामी

भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) देहरादून के ऐतिहासिक चेटवुड ड्रिल स्क्वायर पर शनिवार को आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड (POP) में 481 जेंटलमैन कैडेट भारतीय सेना के अधिकारी बन गए। इस गौरवशाली अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने परेड की सलामी ली और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को सम्मानित किया।

इस वर्ष पासिंग आउट परेड में भारत के 481 जेंटलमैन कैडेट्स के साथ 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट्स भी शामिल रहे। कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद इन कैडेट्स ने राष्ट्र सेवा की शपथ के साथ अपने सैन्य जीवन की नई शुरुआत की।

राष्ट्रपति ने की परेड की समीक्षा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने परेड का निरीक्षण करते हुए कैडेट्स की अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्ट प्रशिक्षण की सराहना की। सैन्य बैंड की गूंज और सटीक कदमताल के बीच आयोजित समारोह ने देशभक्ति और गौरव का वातावरण निर्मित किया।

‘अंतिम पग’ बना भावुक क्षण

परेड का सबसे भावुक और गौरवपूर्ण क्षण पारंपरिक ‘अंतिम पग’ रहा, जब कैडेट्स ने अकादमी परिसर में अंतिम कदम रखते हुए भारतीय सेना के अधिकारी के रूप में नई जिम्मेदारियों का स्वागत किया। इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए बड़ी संख्या में अभिभावक और अतिथि उपस्थित रहे।

भारतीय सेना को मिला नया नेतृत्व

481 युवा अधिकारियों के शामिल होने से भारतीय सेना को नई ऊर्जा और युवा नेतृत्व प्राप्त हुआ है। वहीं 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट अपने देशों में भारतीय सैन्य प्रशिक्षण की उत्कृष्ट परंपरा और पेशेवर दक्षता का अनुभव लेकर लौटेंगे।

सैन्य क्षमता और वैश्विक साझेदारी का प्रतीक

आईएमए की पासिंग आउट परेड केवल सैन्य प्रशिक्षण का समापन नहीं, बल्कि भारत की सैन्य क्षमता, नेतृत्व निर्माण और वैश्विक रक्षा सहयोग का भी प्रतीक है। भारतीय सैन्य अकादमी से प्रशिक्षित अधिकारी दुनिया के कई देशों की सेनाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, जिससे यह संस्थान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।

इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सैन्य अधिकारी, अभिभावक और अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। परेड के समापन के साथ भारतीय कैडेट भारतीय सेना में अधिकारी बने, जबकि विदेशी कैडेट अपने-अपने देशों की सेनाओं में सेवाएं देने के लिए रवाना हुए।

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