ईरान-अमेरिका तनाव से ग्लोबल बाजारों में दबाव, एशियाई शेयर बाजारों में बिकवाली हावी

वैश्विक बाजारों में एक बार फिर अनिश्चितता और दबाव का माहौल देखने को मिल रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर अमेरिकी, यूरोपीय और एशियाई शेयर बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। अधिकांश प्रमुख बाजारों में बिकवाली का दबाव बना हुआ है और निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इसके चलते वॉल स्ट्रीट में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान कमजोरी देखने को मिली।

अमेरिकी बाजार में एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 7,386.65 अंक पर बंद हुआ। वहीं, नैस्डेक इंडेक्स 250.84 अंक यानी 0.97 प्रतिशत टूटकर 25,678.82 अंक पर पहुंच गया। डाउ जॉन्स फ्यूचर्स में भी कमजोरी का रुख बना हुआ है और यह शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ ट्रेड करता दिखाई दिया।

यूरोपीय बाजारों में भी दबाव का असर देखने को मिला। ब्रिटेन का एफटीएसई इंडेक्स 1.43 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि जर्मनी का डीएएक्स इंडेक्स 0.75 प्रतिशत कमजोर रहा। हालांकि फ्रांस का सीएसी इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहा, जिससे यूरोपीय बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला।

एशियाई बाजारों में भी निवेशकों की चिंता स्पष्ट दिखाई दी। नौ प्रमुख एशियाई सूचकांकों में से सात गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। जापान का निक्केई इंडेक्स 1 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 4 प्रतिशत से ज्यादा की भारी गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।

इसके अलावा ताइवान वेटेड इंडेक्स, हैंग सेंग, शंघाई कंपोजिट और स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स में भी कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि गिफ्ट निफ्टी और जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स ने बाजार की नकारात्मक धारणा के बीच कुछ मजबूती दिखाई।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक निवेश धारणा, ऊर्जा कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। खासकर तेल की कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव उभरते बाजारों के लिए चुनौती बन सकता है।

फिलहाल निवेशकों की नजरें अमेरिका-ईरान से जुड़े घटनाक्रम, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर बनी हुई हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने की स्थिति में आने वाले दिनों में वैश्विक शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

Share

Similar Posts