एनएलसी इंडिया में 3% हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, OFS के लिए 303 रुपये तय किया फ्लोर प्राइस
केंद्र सरकार ने अपनी नवरत्न कंपनी एनएलसी इंडिया लिमिटेड में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए कंपनी में कुल 3 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इसके लिए प्रति शेयर 303 रुपये का फ्लोर प्राइस निर्धारित किया गया है।
कंपनी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, बिक्री पेशकश (OFS) मंगलवार को गैर-खुदरा निवेशकों के लिए खुल गई है, जबकि खुदरा निवेशक बुधवार को इसमें भाग ले सकेंगे।
बाजार भाव से करीब 10 प्रतिशत कम फ्लोर प्राइस
एनएलसी इंडिया के शेयरों की बिक्री 303 रुपये प्रति शेयर के भाव पर की जाएगी। यह मूल्य सोमवार को बीएसई पर शेयर के बंद भाव 335.65 रुपये की तुलना में लगभग 9.73 प्रतिशत कम है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि छूट के साथ तय किया गया फ्लोर प्राइस निवेशकों की रुचि बढ़ाने में मदद कर सकता है।
पहले 2%, फिर 1% ग्रीन शू विकल्प
निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणीश चावला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि सरकार प्रारंभिक तौर पर 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है।
इसके साथ ही 1 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने के लिए ग्रीन शू ऑप्शन भी रखा गया है। यदि निवेशकों की ओर से मांग अधिक रहती है, तो सरकार इस अतिरिक्त हिस्सेदारी की बिक्री भी कर सकती है।
मजबूत प्रदर्शन का हवाला
अरुणीश चावला ने कहा कि एनएलसी इंडिया मजबूत परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन वाली कंपनी है। कंपनी लगातार बेहतर रिटर्न और आकर्षक लाभांश प्रदान कर रही है, जिसके कारण यह दीर्घकालिक निवेशकों के लिए एक अच्छा अवसर हो सकती है।
चालू वित्त वर्ष में सरकार ने जुटाए 12 हजार करोड़ से अधिक
केंद्र सरकार चालू वित्त वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में अपनी अल्पांश हिस्सेदारी बेचकर अब तक 12,166 करोड़ रुपये जुटा चुकी है।
इनमें प्रमुख रूप से:
- कोल इंडिया से 5,542 करोड़ रुपये
- एनएचपीसी से 4,357 करोड़ रुपये
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से लगभग 2.27 करोड़ रुपये
की राशि प्राप्त हुई है।
क्या है NLC India?
एनएलसी इंडिया लिमिटेड देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की खनन और ऊर्जा कंपनियों में शामिल है। कंपनी मुख्य रूप से लिग्नाइट खनन, बिजली उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के क्षेत्र में कार्य करती है।
सरकार की यह हिस्सेदारी बिक्री रणनीतिक विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सरकारी हिस्सेदारी कम करते हुए राजस्व जुटाना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एनएलसी इंडिया की मजबूत वित्तीय स्थिति और ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार योजनाओं के चलते OFS को निवेशकों से अच्छा प्रतिसाद मिलने की संभावना है।
