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Iran-Israel Conflict: ईरान की मिसाइलों का इज़राइल ने दिया जवाब, क्षेत्रीय तनाव चरम पर

पश्चिम एशिया फिर युद्ध के कगार पर

पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े युद्ध के खतरे का सामना कर रहा है। रविवार देर रात ईरान द्वारा इज़राइल पर मिसाइल हमला किए जाने के बाद सोमवार तड़के इज़राइली रक्षा बलों (IDF) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया। 8 अप्रैल को हुए अस्थायी युद्धविराम के बाद यह दोनों देशों के बीच पहला सीधा सैन्य टकराव है। वर्तमान में इज़राइल को यमन से भी मिसाइल हमलों का खतरा बना हुआ है जिससे इज़राइल में डर का माहौल है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इज़राइल उन्हें रोकने की पूरी कोशिश कर रहा यही जिससे यह युद्ध ना हो।

ईरान ने क्यों किया हमला?

ईरान ने रविवार को इज़राइल पर मिसाइलें दागीं। तेहरान ने पहले चेतावनी दी थी कि यदि इज़राइल लेबनान पर हमले जारी रखता है तो वह कार्रवाई करेगा। लेबनान और इज़राइल के बीच चल रहा संघर्ष इस क्षेत्रीय संकट का एक प्रमुख युद्ध के कारण बना हुआ है। रविवार को इज़राइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर बिना पूर्व चेतावनी के हवाई हमले किए। यह कदम अमेरिका की उस अपील के विपरीत था जिसमें उसने लड़ाई को और ना बढ़ाने की बात कहीं थी। इज़राइल का दावा है कि उसके हमलों से पहले ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह ने भी रविवार को इज़राइल पर हमला किया था।

ट्रंप ने नेतन्याहू से क्या कहा?

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ड्रोनल ट्रम्प इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से कहा कि वे ईरान के खिलाफ जवाबी हमला न करें और कूटनीति को मौका दें। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका ने बेरूत पर इज़राइली हमले के लिए कोई “ग्रीन सिग्नल” नहीं दिया था।

क्या अमेरिका-ईरान समझौता करीब है?

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि हालात को और न बिगाड़ें क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौते की दिशा में सकारात्मक प्रगति हो रही है। अधिकारी के अनुसार, ट्रंप का मानना है कि दोनों पक्ष किसी अच्छे समझौते के करीब हैं। हालांकि नेतन्याहू ने इस सलाह पर पूरी तरह सहमति नहीं जताई, लेकिन अंततः उन्होंने कुछ हद तक इसे स्वीकार किया।

इस बीच, ईरान, इज़राइल, लेबनान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएँ बढ़ गई हैं और दुनिया की नज़रें अब संभावित कूटनीतिक समाधान पर टिकी हैं।

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