Sawan Shivratri 2026: सावन शिवरात्रि कब है? जानें जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व
भगवान शिव के भक्तों के लिए सावन माह का विशेष महत्व होता है। इस पूरे महीने में शिव पूजा, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक का विशेष पुण्य प्राप्त होता है, लेकिन सावन शिवरात्रि का दिन सबसे अधिक फलदायी माना जाता है। इस दिन लाखों श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
सावन शिवरात्रि 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि मनाई जाती है। वर्ष 2026 में सावन शिवरात्रि 11 जुलाई 2026, शनिवार को मनाई जाएगी।
जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त
सावन शिवरात्रि पर ब्रह्म मुहूर्त से लेकर निशीथ काल तक शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
पूजा का विशेष समय:
- ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 4:10 बजे से 4:52 बजे तक
- प्रातःकालीन पूजा : सुबह 5:30 बजे से 8:30 बजे तक
- निशीथ काल पूजा : रात्रि लगभग 12 बजे के आसपास (स्थानीय पंचांग अनुसार)
सावन शिवरात्रि का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर श्रद्धा से भगवान शिव का अभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अविवाहित युवाओं को योग्य जीवनसाथी, विवाहित लोगों को सुखी दांपत्य जीवन तथा भक्तों को मानसिक शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान शिव का गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद चंदन और अक्षत अर्पित करें।
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
- शिव चालीसा और रुद्राष्टक का पाठ करें।
- शाम को भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
क्या अर्पित करें?
- गंगाजल
- कच्चा दूध
- बेलपत्र
- धतूरा
- शहद
- सफेद फूल
- चंदन
सावन शिवरात्रि को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का सबसे विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा जीवन में सुख, शांति और सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है।
