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सीमा विवाद पर नेपाल में सियासी घमासान, पीएम बालेन्द्र शाह के बयान के खिलाफ छात्र संगठनों का प्रदर्शन

काठमांडू। नेपाल में सीमा संबंधी एक विवादित बयान को लेकर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। विपक्षी वामपंथी दलों से जुड़े छात्र संगठनों ने गुरुवार को राजधानी काठमांडू में प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और उनके इस्तीफे की मांग की।

करीब एक दर्जन वामपंथी छात्र संगठनों के संयुक्त आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री शाह का हालिया सीमा संबंधी बयान राष्ट्रीय हितों और देश की संप्रभुता के विरुद्ध है। उन्होंने इसे राष्ट्रविरोधी बताते हुए सरकार से अपने रुख पर पुनर्विचार करने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान छात्र संगठनों ने प्रधानमंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध सभा को संबोधित करते हुए नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सुदेश पराजुली ने कहा कि संसद में दिया गया यह वक्तव्य राष्ट्रहित पर गंभीर आघात के समान है। उन्होंने कहा कि देश चलाना आसान काम नहीं है और सरकार को राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

पराजुली ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा करने में विफल दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि जनता को जागरूक करने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए उनकी पार्टी को सड़क पर उतरना पड़ा है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सरकार से विवादित बयान वापस लेने और इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख सामने रखने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सीमा और संप्रभुता से जुड़े विषयों पर सरकार को बेहद जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ बयान देना चाहिए।

उधर, इस मुद्दे पर विभिन्न विपक्षी दलों और राजनीतिक समूहों की प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीमा संबंधी इस बयान को लेकर नेपाल की राजनीति में बहस और तेज हो सकती है तथा आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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