नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म मामले में दो दोषियों को 20-20 साल की सजा, कोर्ट ने लगाया 3.40 लाख का जुर्माना

चित्तौड़गढ़। विशेष न्यायालय लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पोक्सो)-2 की न्यायाधीश शहनाज परवीन ने नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के करीब दो वर्ष पुराने मामले में दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए 20-20 वर्ष के कठोर कारावास और प्रत्येक पर 3 लाख 40 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

विशेष लोक अभियोजक शिवराज सिंह तथा पीड़िता पक्ष के अधिवक्ता गुलशेर अली सैय्यद ने बताया कि 8 मई 2024 को भदेसर थाने में एक व्यक्ति ने अपनी कक्षा 8 में अध्ययनरत नाबालिग पुत्री के स्कूल जाते समय अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की जांच तत्कालीन थानाधिकारी रविंद्र सेन ने की और आरोपी शुभम माली पुत्र भारमल माली निवासी कन्नौज, थाना भदेसर को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर एक अन्य आरोपी मुकेश पुत्र जगदीश आचार्य निवासी कन्नौज की भूमिका भी न्यायालय के समक्ष रखी। उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए न्यायालय ने प्रथम दृष्टया अपराध प्रमाणित मानते हुए मुकेश के विरुद्ध भी संज्ञान लिया और उसके खिलाफ आरोप तय किए।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 18 गवाह, 39 दस्तावेज और दो भौतिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। सभी साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को अपहरण और दुष्कर्म का दोषी माना।

अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं तथा पोक्सो एक्ट के प्रावधानों के तहत दोनों आरोपियों को विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई। प्रमुख रूप से दुष्कर्म और पोक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में दोनों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास के साथ भारी जुर्माने से दंडित किया गया। सभी सजाएं न्यायालय के आदेशानुसार लागू होंगी।

इस मामले की विशेष बात यह रही कि पुलिस ने प्रारंभिक रूप से केवल एक आरोपी के खिलाफ चालान पेश किया था, लेकिन सुनवाई के दौरान सामने आए साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर न्यायालय ने दूसरे आरोपी की भूमिका भी अपराध में प्रमाणित मानते हुए उसे दोषी करार दिया और सजा सुनाई।

न्यायालय के इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ अपराधों के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जिसमें उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी दोषियों को कानून के दायरे में लाया गया।

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