जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग जरूरी : मुख्यमंत्री मोहन माझी
भुवनेश्वर, 04 जून (हि.स.)। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गुरुवार को पुरी में आयोजित ब्रिक्स डिजास्टर रिस्क रिडक्शन वर्किंग ग्रुप (डीआरआरजी) की तकनीकी बैठक का उद्घाटन करते हुए जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न बढ़ती चुनौतियों के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय एवं अंतर-राज्यीय सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और अधिकारियों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में वैश्विक प्रयासों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक स्थिरता, सतत विकास और मानव सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, तेजी से हो रहे शहरीकरण और पर्यावरणीय क्षरण के कारण दुनिया भर में प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है, जिससे बेहतर तैयारी और समन्वित कार्रवाई समय की आवश्यकता बन गई है।
ओडिशा के आपदा प्रबंधन मॉडल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने “शून्य मृत्यु” सिद्धांत पर आधारित एक प्रभावी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहे गए मॉडल का विकास किया है। वैज्ञानिक योजना, आधुनिक पूर्व चेतावनी प्रणाली, मजबूत बुनियादी ढांचे, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से राज्य ने अपनी आपदा तैयारी क्षमता को लगातार मजबूत किया है।
उन्होंने बताया कि ओडिशा चक्रवात, लू, बिजली गिरने, तटीय क्षरण और शहरी जलवायु जोखिमों के प्रति अत्यंत संवेदनशील राज्य है। इसके बावजूद बेहतर तैयारी और मजबूत संस्थागत व्यवस्था के कारण आपदाओं से होने वाले नुकसान को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है। हालांकि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी नवाचार और वैश्विक सहयोग को और बढ़ाने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आपदा जोखिम न्यूनीकरण संबंधी नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का 10 सूत्रीय एजेंडा तैयारी, तकनीक, जोखिम आधारित विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।
उन्होंने राज्य में चल रही महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 160 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड कोस्टल हाईवे चक्रवात प्रभावित तटीय क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने के साथ-साथ निकासी और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करेगा। इसके अलावा 111 किलोमीटर लंबा कैपिटल रीजन रिंग रोड तथा भुवनेश्वर-कटक-पुरी-पारादीप आर्थिक क्षेत्र परियोजना भी आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि वर्ष 1999 के महाचक्रवात से मिले अनुभवों ने ओडिशा को एक मजबूत और प्रभावी आपदा प्रबंधन प्रणाली विकसित करने में मदद की है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय समुदाय सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाला घटक होता है, इसलिए राज्य सरकार ने अंतिम व्यक्ति तक सूचना पहुंचाने और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान दिया है।
बैठक में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष कृष्ण एस. वत्सा तथा सदस्य रीता मिसाल भी मौजूद रहीं।
मुख्यमंत्री मोहन माझी ने विश्वास जताया कि “पुरी डेलिबरेशन” वैश्विक आपदा जोखिम न्यूनीकरण के प्रयासों को नई दिशा देगा और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
