प्रधानमंत्री मोदी ने बताया एकता का मंत्र, बोले- नागरिकों की एकजुटता से राष्ट्र छूता है नई ऊंचाइयां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार सुबह नागरिक एकजुटता और सामूहिक संकल्प की शक्ति को रेखांकित करते हुए देशवासियों के लिए प्रेरणादायक संदेश साझा किया। सोशल मीडिया मंच एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में उन्होंने कहा कि जब नागरिक आपसी सहयोग और एकता के सूत्र में बंधते हैं, तो राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है और देश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में महाभारत के उद्योग पर्व (प्रजागर पर्व) का एक प्रसिद्ध श्लोक साझा किया—
“धूमायन्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च।
धृतराष्ट्रोल्मुकानीव ज्ञातयो भरतर्षभ॥”
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतवासियों के सामूहिक संकल्प और सहयोग की भावना के कारण आज देश निरंतर प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय विकास का आधार केवल नीतियां और योजनाएं नहीं, बल्कि नागरिकों की सहभागिता और एकजुटता भी है।
क्या है श्लोक का अर्थ?
महाभारत का यह श्लोक संगठन और एकता की शक्ति को दर्शाता है। इसका भावार्थ है कि अलग-अलग पड़ी लकड़ियां केवल धुआं देती हैं, लेकिन जब वे एक साथ होती हैं तो प्रज्वलित होकर तेज प्रकाश और ऊष्मा उत्पन्न करती हैं। इसी प्रकार समाज, परिवार और राष्ट्र के लोग जब एकजुट होकर कार्य करते हैं, तो वे बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो जाते हैं।
राष्ट्र निर्माण में एकता का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश ऐसे समय आया है जब देश विभिन्न क्षेत्रों में तेज गति से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने नागरिकों से आपसी सहयोग, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उनका मानना है कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री के इस संदेश को सामाजिक एकता, राष्ट्रीय चेतना और सामूहिक जिम्मेदारी के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह संदेश देशवासियों को एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देता है।
