हरिकांता ओवरसीज की शेयर बाजार में फीकी शुरुआत, लिस्टिंग के दिन ही निवेशकों को 16% से ज्यादा का नुकसान

सिंथेटिक टेक्सटाइल फैब्रिक निर्माण क्षेत्र की कंपनी हरिकांता ओवरसीज ने शेयर बाजार में निराशाजनक शुरुआत की है। कंपनी के शेयर मंगलवार को बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर भारी डिस्काउंट के साथ सूचीबद्ध हुए, जिससे आईपीओ निवेशकों को पहले ही दिन बड़ा झटका लगा।

12.36 प्रतिशत डिस्काउंट पर हुई लिस्टिंग

कंपनी का आईपीओ 91 रुपये प्रति शेयर के भाव पर जारी किया गया था। हालांकि, बाजार में इसकी एंट्री 12.36 प्रतिशत डिस्काउंट के साथ 79.75 रुपये प्रति शेयर पर हुई। लिस्टिंग के तुरंत बाद शेयर में बिकवाली का दबाव बढ़ गया और यह गिरकर 75.77 रुपये के लोअर सर्किट स्तर तक पहुंच गया।

इस तरह आईपीओ निवेशकों को पहले ही दिन प्रति शेयर 15.23 रुपये यानी लगभग 16.74 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ा।

निवेशकों से मिला था फीका रिस्पॉन्स

24.30 करोड़ रुपये का यह आईपीओ 20 मई से 27 मई तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इश्यू को निवेशकों की ओर से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला और यह कुल मिलाकर केवल 1.12 गुना सब्सक्राइब हो पाया।

क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) श्रेणी में 21.33 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) श्रेणी में केवल 0.70 गुना और रिटेल निवेशकों की श्रेणी में मात्र 66 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया।

आईपीओ से जुटाई गई राशि का उपयोग

कंपनी ने आईपीओ के माध्यम से 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 26.70 लाख नए शेयर जारी किए। जुटाई गई राशि का उपयोग नई मशीनरी खरीदने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

वित्तीय प्रदर्शन में दिखी मजबूती

कंपनी के डीआरएचपी के अनुसार, हरिकांता ओवरसीज की वित्तीय स्थिति में हाल के वर्षों में सुधार देखा गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने 4.47 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में 30 नवंबर तक कंपनी का शुद्ध लाभ बढ़कर 5.09 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

राजस्व के मोर्चे पर कंपनी को वित्त वर्ष 2024-25 में 35.50 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई थी, जबकि अगले वित्त वर्ष में नवंबर तक 26.28 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया गया।

कर्ज में कमी, नेटवर्थ में बढ़ोतरी

कंपनी पर कर्ज का बोझ भी घटा है। वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में कंपनी पर 3.26 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अगले वित्त वर्ष में नवंबर तक घटकर 2.87 करोड़ रुपये रह गया।

वहीं कंपनी का नेटवर्थ 13.79 करोड़ रुपये से बढ़कर 18.77 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। रिजर्व और सरप्लस भी 6.59 करोड़ रुपये से बढ़कर 11.68 करोड़ रुपये हो गया।

बाजार की नजर आगे के प्रदर्शन पर

हालांकि कंपनी के वित्तीय आंकड़े सुधार की ओर संकेत करते हैं, लेकिन कमजोर सब्सक्रिप्शन और डिस्काउंट लिस्टिंग ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले समय में कंपनी अपने परिचालन प्रदर्शन और मुनाफे की वृद्धि के जरिए निवेशकों का भरोसा दोबारा जीत पाती है या नहीं।

Share

Similar Posts