नेपाल पीएम के सीमा संबंधी बयान पर सियासी घमासान, विपक्ष ने संसद नहीं चलने देने की दी चेतावनी

नेपाल की राजनीति में सीमा विवाद को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री के संसद में दिए गए बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और संसद की कार्यवाही नहीं चलने देने की चेतावनी दी है।

सोमवार को हुई विपक्षी दलों की बैठक में प्रधानमंत्री के सीमा संबंधी बयान पर कड़ी आपत्ति जताई गई। विपक्षी नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री को अपनी टिप्पणी वापस लेनी चाहिए और सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) के नेता युवराज दुलाल ने बैठक के बाद कहा कि विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि जब तक प्रधानमंत्री अपने बयान पर माफी नहीं मांगते, तब तक संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चलने दी जाएगी।

वहीं नेपाली कांग्रेस संसदीय दल के मुख्य सचेतक निष्कल राई ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी को राष्ट्रहित के खिलाफ बताते हुए इसे संसद की कार्यवाही से हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को संसद में खड़े होकर देशवासियों से माफी मांगनी चाहिए।

विपक्ष का आरोप है कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी नेपाल की सीमा संबंधी आधिकारिक नीति और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं है। विपक्षी दलों ने इसे गंभीर विषय बताते हुए सरकार से तत्काल स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

बैठक में यह भी तय किया गया कि जब तक सरकार विपक्ष की मांगों पर विचार नहीं करती, तब तक संसद में विरोध जारी रखा जाएगा। विपक्षी दलों का कहना है कि संसद के रिकॉर्ड से संबंधित टिप्पणी हटाने और प्रधानमंत्री की माफी के बिना गतिरोध समाप्त नहीं होगा।

इस घटनाक्रम के बाद नेपाल की संसद में राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। अब सभी की नजर सरकार की अगली प्रतिक्रिया और संसद में बनने वाले राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हुई है।

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