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आज से महंगा हुआ कमर्शियल गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और एटीएफ पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में राहत

देशभर में आज से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी लागू हो गई है। तेल एवं गैस विपणन कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए हैं, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हालांकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

दिल्ली में 42 रुपये महंगा हुआ कमर्शियल सिलेंडर

नई दरों के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की वृद्धि हुई है। इसके बाद इसकी नई कीमत 3113.50 रुपये हो गई है। वहीं कोलकाता में इसकी कीमत 53.50 रुपये बढ़कर 3255.50 रुपये पहुंच गई है।

इसके अलावा पांच किलोग्राम वाले छोटे एफटीएल सिलेंडर की कीमत में भी 11 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में अब यह सिलेंडर 821.50 रुपये में उपलब्ध होगा।

घरेलू रसोई गैस की कीमतों में कोई बदलाव नहीं

तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई संशोधन नहीं किया गया है। इससे आम घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिली है।

पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती

कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाने की घोषणा की है। यह नई दरें भी आज से प्रभावी हो गई हैं।

सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विंडफॉल गेन टैक्स को घटाकर 1.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। वहीं डीजल पर यह कर 13.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 9.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

घरेलू ईंधन उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा असर

वित्त मंत्रालय के अनुसार पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर सड़क एवं अवसंरचना उपकर (Road and Infrastructure Cess) शून्य रहेगा। साथ ही घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू करों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर नहीं पड़ेगा।

व्यापारिक क्षेत्र पर बढ़ेगा दबाव

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि का असर होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। वहीं एक्सपोर्ट ड्यूटी में कमी से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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