पानी के टैंकर को लेकर कांग्रेस में घमासान, शेखर पटेल के इस्तीफे की घोषणा के बाद बेटे अमित पटेल ने किया यू-टर्न

इंदौर में भीषण गर्मी और पानी संकट के बीच कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पानी के टैंकर को लेकर हुए विवाद ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस के पूर्व सेवा दल अध्यक्ष शेखर पटेल ने शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और पार्षद राजू भदौरिया के समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। हालांकि कुछ ही घंटों बाद उनके बेटे और इंदौर शहर यूथ कांग्रेस अध्यक्ष अमित पटेल ने पार्टी नहीं छोड़ने की बात कहकर मामले को नया मोड़ दे दिया।

पानी के टैंकर को लेकर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार शनिवार देर रात शेखर पटेल सुखलिया हाइड्रेंट पर पानी का टैंकर भरवाने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और पार्षद राजू भदौरिया के समर्थकों ने उन्हें टैंकर भरने से रोक दिया।

शेखर पटेल का कहना है कि इस घटना से वे बेहद आहत हुए हैं। इसी कारण उन्होंने अपने बेटे अमित पटेल और बहू, वार्ड 20 की पार्षद यशस्वी पटेल के साथ कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की बात कही थी।

अमित पटेल ने कहा- पार्टी नहीं छोड़ेंगे

रविवार सुबह जारी वीडियो संदेश में अमित पटेल ने स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्तियों के व्यवहार से नाराजगी जरूर है, लेकिन उनकी आस्था कांग्रेस की विचारधारा और संगठन में बनी हुई है।

अमित पटेल ने कहा कि पानी के टैंकर को लेकर जो विवाद हुआ है, उसकी शिकायत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचाई जाएगी और संगठन स्तर पर इसका समाधान निकाला जाएगा।

वरिष्ठ नेताओं से हुई चर्चा

शेखर पटेल ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर उनकी वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और सत्यनारायण पटेल से बातचीत हुई है। दोनों नेताओं ने उन्हें धैर्य रखने और मामले का समाधान निकालने का भरोसा दिलाया है।

चिंटू चौकसे ने दी प्रतिक्रिया

वहीं शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे का कहना है कि इस संबंध में उनसे किसी प्रकार की चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।

पानी संकट के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल

इंदौर में पानी की समस्या पहले से ही बड़ा मुद्दा बनी हुई है। ऐसे समय में कांग्रेस नेताओं के बीच सामने आया यह विवाद संगठन की अंदरूनी खींचतान को उजागर कर रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी नेतृत्व जल्द हस्तक्षेप नहीं करता, तो यह मामला आगामी स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।

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