साकेत में चार मंजिला इमारत ढही: कैंटीन और कोचिंग सेंटर पर गिरा मलबा, 11 लोगों को सुरक्षित निकाला
दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के समीप स्थित सैदुल्लाजाब इलाके में शनिवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया, जब एक चार मंजिला व्यावसायिक इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसपास धूल का घना गुबार छा गया। इमारत का भारी मलबा बगल में संचालित कैंटीन और अन्य संरचनाओं पर जा गिरा, जहां उस समय कई छात्र मौजूद थे।
घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, एनडीआरएफ और अन्य राहत एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। देर रात तक चलाए गए संयुक्त राहत एवं बचाव अभियान में 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका के चलते सर्च ऑपरेशन जारी रखा गया।
चौथी मंजिल पर चल रहा था निर्माण कार्य
दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार शाम 7:44 बजे इमारत गिरने की सूचना प्राप्त हुई थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सैदुल्लाजाब की पांच नंबर लेन स्थित इस भवन की चौथी मंजिल पर निर्माण कार्य चल रहा था। राहत दल के पहुंचने तक पूरी इमारत कंक्रीट, सरियों और टूटे हुए खंभों के विशाल मलबे में तब्दील हो चुकी थी।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसा इतना अचानक हुआ कि लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही सेकंड में पूरी इमारत धराशायी हो गई।
कैंटीन में मौजूद छात्रों पर टूटा कहर
हादसे के समय इमारत से सटी कैंटीन में छात्र भोजन कर रहे थे। इमारत गिरने के साथ ही भारी मलबा कैंटीन पर आ गिरा। स्थानीय लोगों और बचाव दल ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और कई छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला।
घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। अस्पताल में देर रात तक परिजनों की भीड़ लगी रही और कई परिवार अपने बच्चों की जानकारी के लिए परेशान नजर आए। पुलिस ने घायलों को शीघ्र अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर भी बनाया।
भूतल पर संचालित था कोचिंग संस्थान
पुलिस के अनुसार इमारत के भूतल के एक हिस्से में कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा था। आशंका जताई गई कि मलबे में कुछ छात्र फंस सकते हैं। हालांकि घटना के समय भवन में कुल कितने लोग मौजूद थे, इसकी स्पष्ट जानकारी देर रात तक सामने नहीं आ सकी।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि यह हादसा सप्ताह के कार्यदिवसों में होता तो जनहानि कहीं अधिक हो सकती थी, क्योंकि भवन में कई निजी कार्यालय भी संचालित होते थे और प्रतिदिन सैकड़ों लोगों का आवागमन रहता था।
स्थानीय लोगों ने दिखाई मानवता
हादसे के तुरंत बाद आसपास के लोग मोबाइल फोन की रोशनी और टॉर्च लेकर घटनास्थल पर पहुंच गए। कई लोगों ने पुलिस और दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही राहत कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों ने मलबा हटाकर तीन लोगों को बाहर निकाला और उन्हें अस्पताल पहुंचाने में मदद की।
बाद में एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की टीमों ने संयुक्त अभियान चलाकर राहत कार्य को तेज किया।
आधुनिक उपकरणों से चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन
मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीनों, हाइड्रोलिक जैक और विशेष कटरों का उपयोग किया गया। इसके अलावा विक्टिम लोकेशन कैमरा और अर्थ-ऑगर ड्रिलिंग मशीन जैसे आधुनिक उपकरणों की मदद से संभावित फंसे लोगों की तलाश की गई।
राहत दल देर रात तक मलबे को हटाने और जीवित लोगों की खोज में जुटा रहा।
बिल्डिंग मालिक और निर्माण अनुमति की होगी जांच
हादसे के बाद पुलिस ने भवन के स्वामित्व और निर्माण संबंधी दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा कि प्राथमिकता फिलहाल मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है। इसके बाद यह जांच की जाएगी कि भवन निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।
प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद भवन मालिक और निर्माण कार्य से जुड़े जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
दिल्ली में पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों के दौरान इमारत गिरने की कई घटनाएं सामने आई हैं। अप्रैल 2025 में दयालपुर के शक्ति विहार में बहुमंजिला इमारत ढह गई थी। जुलाई 2025 में आजादपुर मंडी और वेलकम इलाके में भी इमारत गिरने की घटनाएं हुई थीं। वहीं अगस्त 2025 में दरियागंज क्षेत्र में भवन हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी।
फिलहाल साकेत के सैदुल्लाजाब इलाके में राहत एवं बचाव अभियान जारी है। प्रशासन का कहना है कि मलबे में फंसे हर व्यक्ति तक पहुंचने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। देर रात तक हादसे में हताहतों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।






