शंघाई में बिखरी भारतीय संस्कृति की छटा: योग, शास्त्रीय संगीत और कुचिपुड़ी ने जीता दुनिया का दिल
के औद्योगिक और आर्थिक केंद्र शंघाई में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक देखने को मिली। वार्षिक ‘कांसुलर कोर कल्चरल चैरिटी गाला डिनर 2026’ में भारत ने योग, शास्त्रीय संगीत और कुचिपुड़ी नृत्य के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
70 से अधिक देशों के मेहमानों ने सराही भारतीय प्रस्तुति
इस भव्य आयोजन में 70 से अधिक देशों के महावाणिज्य दूत, वरिष्ठ राजनयिक, व्यापारिक प्रतिनिधि और गणमान्य अतिथि शामिल हुए। भारत को इस समारोह में ‘कंट्री ऑफ ऑनर’ (सम्मानित देश) के रूप में आमंत्रित किया गया था, जहां भारत सहित चार देशों को अपनी सांस्कृतिक विरासत प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
भारत का प्रतिनिधित्व शंघाई स्थित भारतीय महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर ने किया।
योग और शास्त्रीय संगीत ने मोहा दिल
कार्यक्रम में भारत की कालातीत देन ‘योग’ और भारतीय शास्त्रीय संगीत परंपरा को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया। भारतीय कलाकारों की प्रस्तुति ने मौजूद दर्शकों का मन मोह लिया और भारत की सांस्कृतिक गहराई को दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से रखा।
इसके अलावा कुचिपुड़ी नृत्य की शानदार प्रस्तुति भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही, जिसे विदेशी मेहमानों ने काफी सराहा।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ का दिया संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर ने भारत के शाश्वत दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (विश्व एक परिवार है) पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आपसी समझ और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
माथुर ने कहा कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने और लोगों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है।
‘विकसित भारत 2047’ की सोच भी रखी सामने
अपने संबोधन में उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति, डिजिटल परिवर्तन, सतत विकास, बुनियादी ढांचे और नवाचार के क्षेत्र में उपलब्धियों का भी जिक्र किया। साथ ही उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने के लिए वैश्विक समुदाय के साथ साझेदारी की भारत की सोच साझा की।
भारत की यह सक्रिय भागीदारी सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत करने और चीन सहित पूर्वी एशियाई देशों के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।






