नेपाल में लोकतंत्र और गणतंत्र दिवस पर PM की चुप्पी चर्चा में, ‘महेन्द्र राजमार्ग’ फैसले से बढ़ीं अटकलें

नेपाल में प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह द्वारा लगातार दो बड़े राष्ट्रीय अवसरों—लोकतंत्र दिवस और गणतंत्र दिवस—पर जनता के नाम कोई शुभकामना संदेश जारी नहीं किए जाने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

नेपाल में वर्षों से यह परंपरा रही है कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता राष्ट्रीय महत्व के अवसरों पर जनता को संबोधित करते हैं और शुभकामना संदेश जारी करते हैं। लेकिन इस वर्ष प्रधानमंत्री शाह ने न तो 24 अप्रैल को मनाए गए लोकतंत्र दिवस पर कोई सार्वजनिक संदेश दिया और न ही 29 मई को आयोजित गणतंत्र दिवस पर जनता को बधाई दी।

गणतंत्र दिवस समारोह में भी नहीं किया संबोधन

इतना ही नहीं, गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान भी प्रधानमंत्री ने कार्यकारी प्रमुख के रूप में राष्ट्र को संबोधित नहीं किया। काठमांडू के सैनिक मंच टुँडिखेल में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में राष्ट्र के नाम संबोधन की जिम्मेदारी राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने निभाई।

सरकारी पक्ष का कहना है कि राष्ट्रपति गणतंत्र के संवैधानिक प्रतीक हैं, इसलिए उनका संबोधन उपयुक्त माना गया। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों और आम नागरिकों के बीच प्रधानमंत्री की चुप्पी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

‘महेन्द्र राजमार्ग’ नामकरण से बढ़ी राजनीतिक चर्चा

इसी बीच नेपाल सरकार के एक अन्य फैसले ने भी नई बहस छेड़ दी है। सरकार ने पूर्व–पश्चिम राजमार्ग का नाम बदलकर पूर्व राजा महेन्द्र के नाम पर “महेन्द्र राजमार्ग” रखने का फैसला किया है।

नेपाल को पूर्व से पश्चिम तक जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण राजमार्ग के नामकरण को कुछ लोग ऐतिहासिक सम्मान के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ वर्गों में इसे राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं

हालांकि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह या सरकार की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे यह माना जाए कि सरकार का झुकाव राजतंत्र की ओर है। बावजूद इसके, लोकतंत्र दिवस और गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री की चुप्पी और राजमार्ग नामकरण के फैसले ने नेपाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।

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